शरण पूर्णिमा पर लक्ष्मी पूजन का विशेष संयोग बन रहा है। शुक्रवार को शरद पूर्णिमा का संयोग सात बाद बन रहा है। लक्ष्मी पूजा के लिए खास दिन होने के साथ ही प्रॉपर्टी की खरीद के लिए है विशेष शुभ मुहूर्त है। ऐसा संयोग अब 13 साल बाद 2033 में 7 अक्तूबर को बनेगा।
ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि 30 अक्तूबर को शरद ऋतु में आने वाली आश्विन मास की पूर्णिमा है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान शरद पूर्णिमा पर ही देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। शुक्रवार को पूर्णिमा के होने से इसका शुभ फ ल और बढ़ जाएगा। साथ ही इस बार शरद पूर्णिमा का चंद्रोदय सर्वार्थसिद्धि और लक्ष्मी योग में हो रहा है, जिससे इस दिन लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व रहेगा।
ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि आश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 30 अक्तूबर की शाम 5: 46 पर लग रही है जो कि 31 अक्तूबर शनिवार को रात्रि 8:19 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार पूर्णिमा तिथि 31 अक्तूबर को रहेगी। स्नान, दान, व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठान इसी दिन संपन्न होंगे। शरद पूर्णिमा के पर्व को कौमुदी उत्सव, कुमार उत्सव, शरदोत्सव, रास पूर्णिमा, कोजागिरी पूर्णिमा एवं कमला पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस पूर्णिमा में अनोखी चमत्कारी शक्ति निहित मानी जाती है। 16 कलाओं से युक्त चंद्रमा से निकली रोशनी समस्त रूपों वाली बताई गई है।
ज्योतिषाचार्य दीपक मालवीय ने बताया कि आरोग्य लाभ के लिए शरद पूर्णिमा के चरणों में औषधीय गुण विद्यमान रहते हैं। शरद पूर्णिमा की रात्रि में दूध से बनी खीर को चांदनी की रोशनी में अति स्वच्छ वस्त्र से ढंक कर रखी जाती है। ध्यान रहे कि चंद्रमा के प्रकाश की किरणें उस पर पड़ती रहें। भक्ति भाव से प्रसाद के तौर पर भक्तों में वितरण करके स्वयं भी ग्रहण करते हैं। जिससे स्वास्थ्य लाभ होता है तथा जीवन में सुख सौभाग्य की वृद्धि होती है।
पं. राहुल मिश्र ने बताया कि अश्विन महीने की पूर्णिमा तिथि 30 अक्तूबर को शाम करीब पौने 6 बजे से शुरू हो जाएगी और रातभर पूर्णिमा तिथि रहेगी। इसलिए शुक्रवार की रात को शरद पूर्णिमा पर्व मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि अगले दिन यानी 31 अक्तूबर को पूरे दिन रहेगी और रात को करीब 8 बजे खत्म हो जाएगी। उदया तिथि का मान होने के कारण शनिवार को पूर्णिमा व्रत, पूजा, तीर्थ स्नान और दान किया जाना चाहिए।
पांच शुभ योगों में उदय होगा चंद्रमा
पं. गणेश मिश्र ने बताया कि शरद पूर्णिमा के चंद्रमा का उदय पांच शुभ योगों में होगा। जिनके प्रभाव से अच्छी सेहत और धन लाभ होगा। पूर्णिमा पर तिथि, वार और नक्षत्र से मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बन रहा है। इस योग में किए गए सभी काम सिद्ध होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही लक्ष्मी, शंख, महाभाग्य और शश नाम के 4 राजयोग योग बनने से ये दिन और भी खास रहेगा। इस पर्व पर बृहस्पति और शनि का अपनी-अपनी राशियों में होना भी शुभ संयोग है।
खरीदारी का शुभ मुहूर्त
30 अक्तूबर को प्रॉपर्टी खरीदी के लिए विशेष शुभ मुहूर्त बन रहा है। शरद पूर्णिमा पर सर्वार्थसिद्धि योग होने से इलेक्ट्रॉनिक सामान, ज्वेलरी, फर्नीचर, वाहन और सुख-सुविधा देने वाले अन्य सामानों की खरीदारी की जा सकती है। इस दिन रवियोग और अमृतसिद्धि योग दोपहर 3 बजे तक रहेंगे। इसलिए इससे पहले खरीदारी करना ज्यादा शुभ है। हालांकि, सर्वार्थसिद्धि योग पूरे दिन और रात तक रहेगा।
औषधीय महत्व
शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से अमृत बरसाता है। इस रात में औषधियां चंद्रमा की रोशनी के जरिये तेजी से खुद में अमृत सोखतीं हैं। इसलिए इस दिन चंद्रमा के प्रभाव वाली चीज यानी दूध से खीर बनाई जाती है और चांदी के बर्तन में चंद्रमा की रोशनी में रखी जाती है। ऐसा करने से उसमें औषधीय गुण आ जाते हैं। माना जाता है उस खीर को खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। जिससे कई तरह की बीमारियों से राहत मिलती है।