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14 सालों बाद मिले रघुराई, तुलसी के घाट पर गूंजे जयकारे

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तुलसीदास की कर्मस्थली अयोध्या बन गई। 14 सालों के बाद रघुराई को अपने सामने देखकर श्रद्धालुओं ने नमन किया। चारों भाईयों के मिलाप का दृश्य देखकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। बुधवार को प्रभु श्रीराम व हर-हर महादेव के उद्घोष से तुलसीदास घाट का लीला स्थल गुंजायमान हो उठा।
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बुधवार को लीला में नंदी ग्राम में पर्णकुटी में बैठे भरत श्रीराम की आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ब्राह्मण के वेश में पहुंचे हनुमान ने श्रीराम के आने का समाचार सुनाया तो भरत के खुशी का ठिकाना नहीं रहा। भरत ने यह समाचार गुरु वशिष्ठ व माताओं को बताया और सभी को साथ लेकर श्रीराम की अगवानी करने अयोध्या की सीमा पर पहुंचे। श्रीराम को देखते ही भरत और शत्रुघ्न उनके पैरों में गिर जाते हैं। चारो भाइयों का मिलन होता है। सुमंत को बुलाकर गुरु वशिष्ठ श्रीराम के रामराज्यभिषेक की तैयारी करने का निर्देश देते हैं। सभी स्नान करके नया वस्त्र धारण करते हैं। यहीं पर भगवान की आरती के बाद लीला को विश्राम दिया गया। आरती महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने उतारी। वहीं दूसरी तरफ श्री चित्रकूट की रामलीला में अयोध्या भवन में धनुष बाण की झांकी सजाई गई।
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