शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को प्रणाम करते एलके आडवाणी
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि शंकराचार्य के ब्रह्मलीन होने की सूचना अत्यंत दुखद है। पूज्य स्वामी जी सनातन धर्म के शलाका पुरुष एवं संन्यास परंपरा के सूर्य थे। भारतीय ज्ञान परंपरा में उनके अतुलनीय योगदान को अखिल विश्व अनंत वर्षों तक स्मरण रखेगा। यह संपूर्ण समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। ईश्वर से प्रार्थना है कि इस कठिन समय में हम सभी को कष्ट सहने का साहस दें।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि शंकराचार्य के ब्रह्मलीन होने की सूचना अत्यंत दुखद है। पूज्य स्वामी जी सनातन धर्म के शलाका पुरुष एवं संन्यास परंपरा के सूर्य थे। भारतीय ज्ञान परंपरा में उनके अतुलनीय योगदान को अखिल विश्व अनंत वर्षों तक स्मरण रखेगा। यह संपूर्ण समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। ईश्वर से प्रार्थना है कि इस कठिन समय में हम सभी को कष्ट सहने का साहस दें।
जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने कहा कि अनंत श्री विभूषित परिव्राजक आचार्य द्वारिका पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के पंच भौतिक शरीर पंचतत्व में विलीन होकर उनकी दिव्य चेतना विराट में व्याप्त हुई है। ऐसे महापुरुष का चले जाना धार्मिक आध्यात्मिक जगत की बहुत बड़ी क्षति है।
हिंदुओं की आस्था के ज्योति स्तंभ थे स्वामी स्वरूपानंद
कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि महाराज जी का निधन सनातन धर्म की अपूरणीय क्षति है। वह करोड़ों सनातन हिंदुओं की आस्था के ज्योति स्तंभ थे। इसके अलावा महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे, गंगा सेवा अभियानम के प्रमुख राकेश चंद्र पांडेय, केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के संरक्षक सतीश चंद्र मिश्रा, प्रजा नाथ शर्मा, दिग्विजय सिंह, देवेंद्र सिंह, ब्रह्मदत्त त्रिपाठी, उमेश द्विवेदी, राकेश चंद्र, सरदार सतनाम सिंह ने श्रद्धांजलि अर्पित की।