पहली नजर में हमें न्याय मिला: शिकायतकर्ता आशुतोष पांडे
शिकायत करने वाले आशुतोष पांडे ने कहा कि आज कोर्ट ने अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद जैसे जघन्य अपराधियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश उन नाबालिग बच्चों के लिए जारी किया गया है। पहली नजर में हमें न्याय मिला है। अविमुक्तेश्वरानंद छोटे बच्चों के साथ अश्लील हरकतें, यौन अपराध करता था। एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने के साथ ही कोर्ट ने हमारे दिए गए सबूतों की जांच का भी आदेश दिया है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ इन धाराओं में एफआईआर दर्ज की मांग
एक विशेष पॉक्सो अदालत ने शनिवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश बच्चों के यौन शोषण के आरोपों की जांच के लिए दिया गया है। झूंसी पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी को यह प्राथमिकी दर्ज करनी होगी।
पिछले सप्ताह, विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने इस मामले पर अपना निर्णय सुरक्षित रखा था। आशुतोष पांडे और अन्य द्वारा भारतीय न्याय संहिता की धारा 173(4) के तहत एक आवेदन दायर किया गया था। अदालत ने साक्ष्यों की जांच की और पीड़ित 'बटुक' कहे जाने वाले बच्चों के बयान दर्ज किए। ये लड़के विद्या मठ आश्रम से संबंधित हैं।
याचिकाकर्ता ने अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 69, 74, 75, 76, 79, 109 के तहत प्राथमिकी की मांग की थी। ये सभी धाराएं यौन उत्पीड़न से संबंधित हैं। पॉक्सो अधिनियम की धारा 3/5/9 और 17 के तहत भी प्राथमिकी की मांग की गई थी। अदालत ने याचिका स्वीकार कर पुलिस को जांच करने का आदेश दिया।