पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने बुधवार की शाम काशी के धार्मिक अवमूल्यन पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि काशी धार्मिक प्रदूषण का केंद्र बन गई है। ऐसे में संतों, विद्वानों और नागरिकों का दायित्व है कि स्वच्छ क्रांति का मार्ग प्रशस्त करने के लिए आगे आएं।
शंकराचार्य ने कहा कि काशी विद्वत परिषद के नाम से कुछ संस्थाओं द्वारा फर्जी संतों का खेल चलाया जा रहा है। इस पर रोक लगाई जानी चाहिए। वह अस्सी स्थित दक्षिणामूर्ति मठ में आयोजित सत्संग में श्रद्धालुओं को संदेश दे रहे थे।
शंकराचार्य ने कहा कि दिशाहीन राजतंत्र, व्यापार तंत्र और प्रचार तंत्र के गठजोड़ से धर्म की आस्था पर कुठाराघात किया जा रहा है। दक्षिणा के लोभ में आकर धर्म की मर्यादा के विपरीत काम किया जा रहा है।
शंकराचार्य ने कहा कि दक्षिणा के लोभ से ऊपर उठकर मान्य संतों और विद्वानों को सद्भाव पूर्ण माध्यम से काशी के स्वच्छ स्वरूप को सामने लाना चाहिए।
इसके पहले शंकराचार्य के पटना-अहमदाबाद एक्सप्रेस से मुगलसराय पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। भक्तों के जत्थे के साथ मठ पहुंचे। वहां पादुका पूजन के बाद सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद प्राप्त किया।