नाले को बनाने में लाखौरी ईंट और बरी मसाला प्रयोग किया गया। 1827 में जेम्स प्रिंसेप की कल्पना ने मूर्त रूप लिया। जब काम पूरा हुआ तो पूरे बनारस में प्रिंसेप का सम्मान किया गया। उसको फूल मालाओं से लाद दिया गया।
इनसेट शाही नाले से जुड़ी अन्य ट्रंक लाइनें-
गोदौलिया: यहां इस नाले से कमच्छा, लक्सा, लक्ष्मीकुंड, रामापुरा का सीवर लाइन का कनेक्शन जुड़ा है।
नईसड़क: सुदामापुर, महमूरगंज, आकशवाणी, बैंक नगर कालोनी, सिगरा चौराहा होते हुए आशिक-माशूक की मजार, सिद्धगिरी बाग, सोनिया, औरंगाबाद, पुराना पान दरीबा, लल्लापुरा, पितरकुंडा, काली महाल, अलकुरैश मस्जिद, पनामा तिराहे से आने वाली सीवर लाइन जुड़ी है। इसी प्रकार गोविंदपुरा, दालमंडी, चाहमामा, घुघरानी गली का सीवर लाइन भी जुड़ी है।
मैदागिन: यहां चौक, बुलानाला, कर्णघंटा, गोला दीनानाथ, राजादरवाजा, काशीपुरा, नखास की सीवर लाइन मिलती है।
विशेश्वरगंज: यहां डीएवी कालेज, औसानगंज, दारा नगर, आदमपुरा, यमुना सिनेमा, हरतीरथ से आने वाली सीवर लाइन जुड़ी है।
वर्ष 1982 में आई थी बाधा
1982 में शाही नाला में रुकावट के कारण बहाव बाधित हुआ था। इसके बाद जल संस्थान ने बेनियाबाग में भूमिगत वाटर टैंक बनाया और शाही नाले को खोद कर तिरछा करके इससे जोड़ा।