पानी का स्तर और बढ़ने पर इन मार्गों पर आवागमन पूरी तरह बाधित होने की आशंका है। इससे ग्रामीणों को बाजार, स्कूल, अस्पताल और अन्य जरूरी कामों के लिए आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
उधर, तटवर्ती गांवों को कटान से बचाने के लिए बाढ़ खंड और सिंचाई विभाग की ओर से विभिन्न उपाय किए गए हैं। कटानरोधी कार्य के तहत डैंपरिंग के साथ बोर्डर डालने के अलावा गैरेबियान, बंबू क्रेट और पोरक्यूपाइन लगाए गए हैं।
इनका उद्देश्य नदी की धारा के दबाव को कम कर तटों को कटने से बचाना है। सहबदिया गांव के सामने कटान रोकने के लिए करीब 1200 पोरक्यूपाइन लगाए गए थे, जिसमें से 900 से अधिक डूब गए। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने के बाद इनमें से कई नदी में समा गए हैं या बह गए हैं। इससे कटानरोधी व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है।
बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र सिंह ने बताया कि नदी में लगाए गए गैरेबियान, बंबू क्रेट और अन्य उपकरण बहते नहीं हैं, बल्कि वहीं लांच किए जाते हैं। लांच होने के बाद ये नदी की धारा के दबाव को कम करने और कटान रोकने में मदद करते हैं। विभाग की ओर से नदी के जलस्तर और तटों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
लाटघाट : सरयू नदी में बढ़ते जलप्रवाह का असर डिघिया और बदरहुआ नालों पर भी दिखाई देने लगा है। शनिवार को डिघिया नाले का जलस्तर 13 सेंटीमीटर बढ़कर 70.60 मीटर पहुंच गया, जो खतरे के निशान 70.40 मीटर से 20 सेंटीमीटर ऊपर है। वहीं, बदरहुआ नाले का जलस्तर 14 सेंटीमीटर बढ़कर 71.30 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 71.68 मीटर से 38 सेंटीमीटर नीचे है। एक बार फिर शनिवार को सरयू नदी में 2,86 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
सरयू का जलस्तर बढ़ने से 70 घरों पर मंडराया खतरा
सरयू का जलस्तर लगातार बढ़ने से विकास खंड के आराजी मलहपुरवा, आराजी गंगापुर और आराजी पुरैनिया गांवों के करीब 70 घरों पर कटान का खतरा मंडराने लगा है। नदी का पानी बढ़ने से ग्रामीण अपने घर और बची हुई खेती की जमीन को लेकर चिंतित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। सरयू का जलस्तर बढ़ने से कटान रोकने के लिए लगाए गए पोरक्यूपाइन पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। नदी किनारे बनाए गए 10 कटर भी धीरे-धीरे पानी में समाहित होते जा रहे हैं।
इनमें जो पांच कटर अभी दिखाई दे रहे हैं, वे भी आधे से अधिक पानी में डूब चुके हैं। गांव के पश्चिमी हिस्से में हो रहे रिसाव ने भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि रिसाव जारी रहा तो बची हुई उपजाऊ जमीन को भी बचाना मुश्किल होगा।
ग्रामीण गुलाब ने बताया कि कटान रोकने के लिए लगाए गए अधिकांश कटर नदी में समाहित हो चुके हैं। चार-पांच कटर ही दिखाई दे रहे हैं और उनके ऊपर से पानी बह रहा है। रामजीत ने बताया कि गांव के पश्चिमी तरफ नदी में रिसाव हो रहा है। यदि यह लगातार जारी रहा तो खेती योग्य बची जमीन भी नदी में समा जाएगी। उधर, आराजी गंगापुर और पुरैनिया से करीब एक किलोमीटर पूरब तिवारीपुर में भी कृषि भूमि कटान की चपेट में आ रही है। इससे आसपास के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।