डॉ. मौर्य ने बताया कि घाव के चारों तरफ एंटी रेबीज वैक्सीन की 4 इंजेक्शन लगाई गई। साथ ही नई पलक बनाने के लिए कान के पीछे के स्कीन ग्राफ्ट, भौहों के बगल से रोटेशनल (पेडिकल) ग्राफ्ट को भी लिया गया। टीम में ट्रॉमा सेंटर में डाॅ. प्रियंका सिंह, डॉ. एकाग्रता शुक्ला, डॉ. निर्मला रहीं।
कुत्ते काटने की घटनाओं में तुरंत इलाज जरूरी
बीएचयू ट्रॉमा सेंटर प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह का कहना है कि कुत्ते काटने का चोट बहुत गंभीर होता है। इलाज भी जटिल होता है। जल्दी उपचार हो तो वह ठीक हो जाता है। कुत्ते सबसे ज्यादा (60 से 80 प्रतिशत) अटैक छोटे बच्चों पर करते हैं। जो अपना बचाव नहीं कर पाते।