- महाराष्ट्र के निवासी की आरटीआई में हुआ खुलासा, विजिट और इवेंट तक सीमित रही आंबेडकर चेयर
- आंबेडकर के विचारों पर होना था रिसर्च, सात साल में नहीं प्रकाशित हुआ एक भी रिसर्च पेपर
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। बीएचयू के आंबेडकर चेयर पर पिछले सात साल में इवेंट और नाश्ते-पानी के नाम पर सात लाख रुपये खर्च हो गए लेकिन रिसर्च आउटकम जीरो है। अब तक न कोई रिसर्च पेपर पब्लिश हुआ है और न ही किसी ने रिसर्च के लिए प्रवेश ही लिया। ये खुलासा महाराष्ट्र स्थित अकोला के निवासी रोहित कुमार की एक आरटीआई में हुआ। बताया जा रहा है कि चेयर अब एक्टिव नहीं है और न ही अब कोई चेयर प्रोफेसर है।
बीएचयू में ये चेयर 6 अप्रैल, 2016 को डॉ. आंबेडकर के न्याय के विचारों पर रिसर्च काे बढ़ावा देने के लिए स्थापित की गई थी। भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय और बीएचयू के रजिस्ट्रार ने इस पर समझौता किया था। चार पॉइंट में इसका उद्देश्य भी स्पष्ट किया गया था। बीएचयू के छात्र रोहित ने कहा कि चेयर का फंड सिर्फ विजिट और इवेंट तक ही सीमित है। सामाजिक विज्ञान संकाय में चल रहे इस चेयर में न तो कोई प्रमुख है और न ही कोई छात्र। एक कमरे के ऑफिस में भी अक्सर ताला ही लटका रहता है।
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ये था चेयर का उद्देश्य
- चेयर का मुख्य उद्देश्य आंबेडकर की विचारधारा के दर्शन को समझने, मूल्यांकन करने और प्रसारित किया जाएगा। रिसर्च के लिए बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और छात्रों को एक बेहतर सुविधाओं वाला केंद्र दिया जाएगा।
- अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, धर्म, दर्शन, संवैधानिक अध्ययन, शिक्षा, सामाजिक कार्य, मानवाधिकार जैसे विषयों के साथ-साथ सामाजिक न्याय के लक्ष्य पर चर्चा की जाएगी। प्रत्येक विषय में अनुसंधान और शिक्षण का फोकस वंचित वर्गों पर होगा।
- चेयर समाज के हाशिये पर रहने वाले समूहों और अन्य कमजोर वर्गों के सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन से संबंधित शोध और अध्ययन भी करेगा।
- उनकी विचारधारा और दर्शन का अनुवाद या आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाने का उपयुक्त तरीका ईजाद किया जाए।