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UP: हत्या मामले में सात दोषियों को आजीवन कारावास, छह साल पहले हुआ था खूनी संघर्ष; 1.51 लाख का जुर्माना लगाया

Sat, 16 May 2026 05:38 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, बलिया।

सार

Ballia News: बलिया के टंडवा गांव में 2020 में हुई सुरेंद्रनाथ पांडेय की हत्या और खूनी संघर्ष मामले में अदालत ने सात आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 1.51 लाख रुपये जुर्माना लगाया। वहीं, क्रॉस केस में दूसरे पक्ष के छह लोगों को पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी गई।
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बलिया के पकड़ी थाना क्षेत्र का मामला। - फोटो : अमर उजाला
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UP News: बलिया के पकड़ी थाना क्षेत्र के टंडवा गांव में वर्ष 2020 में हुई सुरेंद्रनाथ पांडेय की हत्या और खूनी संघर्ष के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार झा की अदालत ने मामले के सात अभियुक्तों को हत्या और जानलेवा हमले का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

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अदालत ने अजय, आलोक, अभय, उदयपति, मनीष, अमित और सुभाष जायसवाल को दोषी मानते हुए उम्रकैद के साथ सामूहिक रूप से एक लाख 51 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। न्यायालय ने कहा कि जुर्माना अदा न करने की स्थिति में सभी दोषियों को अतिरिक्त तीन-तीन वर्ष का कारावास भुगतना होगा।

इसी घटना से जुड़े क्रॉस केस की सुनवाई करते हुए अदालत ने दूसरे पक्ष के छह अभियुक्तों संजय वर्मा, सत्येंद्र पांडे, अभिषेक पांडे, लक्ष्मण वर्मा, अमरजीत वर्मा और अभिषेक वर्मा को भी दोषी पाया। अदालत ने इन सभी को पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही कुल 51 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना न देने पर छह-छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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आरोपियों पर जुर्माना भी लगाया

अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना 30 अप्रैल 2020 की सुबह करीब सात बजे टंडवा गांव में पुरानी रंजिश को लेकर हुई थी। वादी अभिषेक पांडे ने थाने में दर्ज तहरीर में बताया था कि वह अपने पिता सुरेंद्रनाथ पांडे और भाई सत्येंद्र के साथ मिर्चा और बैंगन के खेत से काम करके घर लौट रहे थे।

आरोप है कि जैसे ही वे पिंटू पांडे के खेत के पास पहुंचे, पहले से घात लगाए बैठे विपक्षी पक्ष के लोगों ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला कर दिया। हमले में सुरेंद्रनाथ पांडे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी, जबकि अन्य लोग भी घायल हुए थे। करीब छह वर्ष तक चली सुनवाई और गवाहों के बयान के बाद अदालत ने दोनों पक्षों के मामलों में दोष सिद्ध मानते हुए यह फैसला सुनाया।
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