अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना 30 अप्रैल 2020 की सुबह करीब सात बजे टंडवा गांव में पुरानी रंजिश को लेकर हुई थी। वादी अभिषेक पांडे ने थाने में दर्ज तहरीर में बताया था कि वह अपने पिता सुरेंद्रनाथ पांडे और भाई सत्येंद्र के साथ मिर्चा और बैंगन के खेत से काम करके घर लौट रहे थे।
आरोप है कि जैसे ही वे पिंटू पांडे के खेत के पास पहुंचे, पहले से घात लगाए बैठे विपक्षी पक्ष के लोगों ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला कर दिया। हमले में सुरेंद्रनाथ पांडे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी, जबकि अन्य लोग भी घायल हुए थे। करीब छह वर्ष तक चली सुनवाई और गवाहों के बयान के बाद अदालत ने दोनों पक्षों के मामलों में दोष सिद्ध मानते हुए यह फैसला सुनाया।