सात साल में 7.5 किमी शाही नाले की सफाई जून में पूरी हो गई है। सफाई पर 85 करोड़ रुपये खर्च किए गए। जुलाई में प्रधानमंत्री के दौरे में इसे लोकार्पण की सूची में शामिल किया जा सकता है। अब डाउन स्ट्रीम खिड़किया घाट पर गिरने वाला नाला पूरी तरीके से बंद कर दिया गया है। इस नाले को चौकाघाट पंपिंग स्टेशन से दीनापुर एसटीपी की ओर मोड़ा गया है। जहां सीवर को ट्रीट किया जा रहा है।
मुगलकाल के दौरान शाही नाले को शाही सुरंग के नाम से जाना जाता था। खासियत यह है कि इसके अंदर से दो हाथी एक साथ गुजर सकते हैं। इस नाते इसे हाथी नाला भी कहा जाता है। बुजुर्गों का कहना है कि अंग्रेजों ने इसी शाही सुरंग के सहारे बनारस की सीवर समस्या सुलझाने का काम शुरू किया। जेम्स प्रिंसेप की कल्पना के अनुसार, इसका काम वर्ष 1827 में पूरा हुआ था। इसे लाखौरी ईंट और बरी मसाले से बनाया गया था। रोबोटिक कैमरों की मदद से इस नाले की भौतिक स्थिति का बारीकी से अध्ययन करने के बाद सफाई की गई। काफी दिनों तक लहुराबीर से गिरजाघर तक लोहे की पाइपों के सहारे सफाई कराई गई थी। इसके बाद लहुराबीर से पिपलानी तक सफाई के बाद चौकाघाट की ओर लाइन को डायवर्ट किया गया है।
कोट्स
शाही नाले की सफाई का कार्य पूरा हो गया है। इसकी लंबाई 7.5 किमी है। 2015 में सफाई कार्य शुरू किया गया था। इसे साफ करने में काफी दिक्कतें आईं । - घनश्याम द्विवेदी, मुख्य अभियंता जल निगम