उधर, ग्रामीणों में इस बात की चर्चा है कि जंसा थाने की लापरवाही के चलते पीड़ित की बात नहीं सुनी गई और जंसा थाने की पुलिस उसे घुमाती रही। ट्विटर और सोशल मीडिया की ताकत का नतीजा रहा कि पुलिस अपनी किरकिरी कराने के बाद आरोपियों पर कार्रवाई की।
गांजा, अवैध शराब सहित अन्य मामलों में पुलिस जहां आरोपियों की फोटो जारी करती है, लेकिन इस मामले में पुलिस आरोपियों की फोटो तक नहीं जारी की। जंसा थाने की पुलिस आरोपियों तक किसी को पहुंचने नहीं दी। सर्किल स्तर के एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि आरोपी जेल भेज गए, यही बहुत है। कोर्ट में दाखिल कब कराया गया, सर्किल स्तर के अधिकारी यह भी नहीं बता सके। बोले, इससे हमारी विवेचना प्रभावित होगी।