कचहरी परिसर में बने मालखाने की हालत भी ठीक नहीं है। वर्ष 1910 में बने इस भवन की स्थिति इतनी जर्जर है कि बाहर से इसकी दीवारें दरक रही हैं अंदर रखे दस्तावेजों के खराब होने का खतरा बना है। इसमें जरूरी कागजातों के साथ ही कुछ आभूषण भी रखे जाते हैं। इसका जीर्णोद्धार अब तक नहीं हो सका है। इस तरह की स्थिति तब है जब कचहरी परिसर में ही जिलाधिकारी और कमिश्नर का कार्यालय भी है।
चिरईगांव ब्लॉक में बना उपकेंद्र इमीलिया की भी स्थिति खराब है। इसकी दीवारें क्षतिग्रस्त है, दरवाजा भी टूटा है। पिंडरा के फूलपुर में जच्चा बच्चा केंद्र की हालत भी जर्जर हो गई है। जिससे डिलीवरी बंद चल रही है। क्षेत्र के थरी, मानी, देवापुर, फूलपुर कई गांव के लोगों को पिंडरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आना पड़ता है। चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर संतोष सिंह ने बताया कि इसकी सूचना विभाग को दे दी गई है।
परिषदीय विद्यालयों की दशा व दिशा बदलने के लिए सरकार भले ही प्रयास कर रही है, मगर कई विद्यालयों की हालत ठीक नहीं है। प्राथमिक विद्यालय जक्खिनी, शेख सलीम फाटक, पिसनहरिया, खरीकुआं प्राथमिक विद्यालय, प्राथमिक विद्यालय पुलिस लाइन सहित दर्जनों ऐसे विद्यालय हैं, जिनकी स्थिति बदहाल है। कई जर्जर भवनों में पढ़ाई भी हो रही है।