वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के चार संविदा शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से रिव्यू के बाद भी इन शिक्षकों को विश्वविद्यालय ने नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया। शिक्षक अब कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। वहीं शिक्षकों की कमी से बीएफए व एमएफए पाठ्यक्रम के छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
काशी विद्यापीठ के मुख्य परिसर, गंगापुर और एनटीपीसी परिसर के 78 संविदा शिक्षकों ने नवीनीकरण और चार माह के वेतन भुगतान के लिए 24 दिनों तक सत्याग्रह किया था। सत्याग्रह समाप्ति के बाद कुलसचिव के समझाने के बाद 24 शिक्षकों ने रिव्यू कमेटी के सामने साक्षात्कार दिया था। रिव्यू कमेटी ने बीएफए व एमएफए के शिक्षकों की योग्यता पर प्रश्नचिन्ह खड़ाकर चार शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देने से इंकार कर दिया। इसमें गंगापुर का एक और एनटीपीसी परिसर के तीन शिक्षक शामिल हैं। शिक्षकों को महीने भर दौड़ाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने दो टूक जवाब दे दिया। इसके कारण संविदा शिक्षकों में रोष व्याप्त है। वहीं दूसरी तरफ शिक्षकों केचार माह के बकाया वेतन के निस्तारण के लिए अभी तक कमेटी का गठन भी नहीं हुआ है। शिक्षकों ने बताया कि उनके सामने कोर्ट जाने और सत्याग्रह करने के अलावा अब कोई विकल्प नहीं बचा है।