वाराणसी से झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के बीच टूरिस्ट बसों की आवाजाही है। ऐसे में टूरिस्ट बसों ने शहर में जाम की समस्या और बढ़ा दी है।
ट्रेनों में कंफर्म सीट नहीं मिलने का फायदा ट्रैवल्स संचालक खूब उठा रहे हैं। धर्म और सांस्कृतिक नगरी काशी में देश के विभिन्न राज्यों से पर्यटकों की आवाजाही हो रही है। झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के बीच टूरिस्ट बसों की आवाजाही सबसे अधिक है। इसमें डबल डेकर बसें भी शामिल हैं।
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वातानुकूलित और साधारण बसों के लिए काशी में पार्किंग नहीं है। कलेक्ट्री फार्म, चांदपुर से रोहनिया, भास्करा तालाब की दोनों सर्विस लेन पर बसें खड़ी कराई जा रही हैं। सारनाथ रिंग रोड की सर्विस लेन भी टूरिस्ट बसों की पार्किंग बन चुकी है।
श्रीकाशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद से काशी में धार्मिक पर्यटकों की संख्या साल-दर-साल बढ़ी है। लंबी दूरी की ट्रेनों में सीटें नहीं होने के कारण श्रद्धालु अब बसों का सहारा ले रहे हैं। कई ऐसे टूर ट्रैवल्स संचालक हैं, जिन्होंने ट्रेनों को छोड़कर निजी बसों का सहारा लिया। निजी बसों के जरिये श्रद्धालुओं को काशी दर्शन कराया जा रहा है। कुछ ऐसे भी ट्रैवल्स हैं, जो निजी बसें रोजाना विभिन्न रूटों पर संचालित करा रहे हैं। प्रत्येक सवारी के साथ पार्सल भी लोड-अनलोड कराते हैं।
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जीएसटी चोरी भी, शराब-गांजा की तस्करी भी
झारखंड, बिहार और दिल्ली रूटों की बसों से पार्सल भी ढोए जाते हैं। जीएसटी चोरी करते हुए माल मंगाया जाता है। वहीं, बिहार रूट पर संचालित बसों से शराब-गांजा की तस्करी भी होती है। पुलिस की टीमें बीच-बीच में इसका खुलासा भी करती रही हैं।