मनीष को गोली लगने की जानकारी मिलते ही साथियों ने तत्परता दिखाई। टीआई के साथ एसओ चितईपुर, सारनाथ और लंका के थानेदार पूरा रास्ता खाली कराते ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। जिसके कारण मनीष की जान बच गई। आश्रित कोटे से 2012 में नौकरी पाने वाले मनीष चितईपुर से पहले कपसेठी और सिगरा में तैनात रहे। मनीष के बड़े भाई राजेन्द्र सुल्तानपुर में सिपाही हैं। छोटा भाई मोनू आशापुर में रहकर प्राइवेट नौकरी करता है। मनीष का तीन साल का बेटा अयांश है। पत्नी की माने तो मनीष होली की खरीदारी करने के लिए निकलने वाले थे। इस दौरान गोली चल गई।