बीएचयू के वैदिक विज्ञान और उज्जैन के सांदीपनि आश्रम के वैज्ञानिकों के बीच हुई संगोष्ठी
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वेद का अध्ययन करने वाले विद्यार्थी अंग्रेजी भाषा का ज्ञान, तकनीक और आधुनिक वैज्ञानिक विषयों का अध्ययन कर स्वयं को विशिष्ट बना सकते है। उन्हें अपने ज्ञान को कर्मकांड तक सीमित नहीं रखना चाहिए। ये बातें बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र में संगोष्ठी में समन्वयक प्रो. विनय कुमार पांडेय ने कहीं। शनिवार को यज्ञ की वैज्ञानिकता और उपयोगिता को लेक उज्जैन के महर्षि सांदीपनी राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान के वैज्ञानिकों की मदद से कार्यक्रम में कई जानकारियां सामने आईं।
कोयंबटूर स्थित अमृत विवि से आए डॉ. सुश्रुत एस ने कहा वातावरण में फैल रहे रहे बैक्टीरिया के समाधान के लिए यज्ञ होने चाहिए। ये आबो हवा को शुद्ध करते हैं। शरीर के सभी रोगों का संबंध वात, पित्त और कफ से होता है जिसके मापन के लिए नाड़ी तरंगिनी यंत्र का इस्तेमाल होना चाहिए। इस दौरान यज्ञ के वैज्ञानिक प्रभाव को मापने के लिए उपकरणों से संबंधित पीपीटी दिखाकर उपकरणों से अवगत कराया।