वाराणसी में बुधवार को बीएचयू सिंह द्वार पर झारखण्ड में हुए छात्रों पर लाठीचार्ज व पेपर लीक को
- झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में सिंह द्वार पर एबीवीपी संगठन का आक्रामक प्रदर्शन, छात्रसंघ भवन में उपवास और धरना
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में बुधवार को बीएचयू में भी आवाज उठी। छात्रसंघ भवन में उपवास और धरना प्रदर्शन तो दूसरी ओर सिंह द्वार पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन करने गए छात्रों और पुलिसकर्मियों के बीच जमकर धक्कामुक्की हुई। जलते पुतले को छीनने के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों और छात्रों के हाथ मामूली रूप से झुलस भी गए। एबीवीपी का प्रदर्शन ऐसा आक्रामक था कि प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मी दूर ही खड़े रहे। लंका सहित कई थानों से आई पुलिस को काफी देर तक मशक्कत करनी पड़ी। इस बीच छात्र गेट पर ही बैठकर नारेबाजी करने लगे। पुलिस ने एक-एक करके वहां से उठाना शुरू किया और धरने से अलग कर दिया। इस बवाल के बीच कई छात्र और पुलिसकर्मियों को हल्की-फुल्की चोटें भी आईं।
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उठी सीबीआई जांच की मांग
एबीवीपी के केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रमुख राहुल राणा ने कहा कि इन सभी की सीबीआई जांच की जाए। झारखंड में पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के सामने आने के बाद ये स्थिति बनी है। इकाई अध्यक्ष पल्लव सुमन ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने झारखंड सरकार से आंदोलनरत छात्रों की मांगों को तत्काल स्वीकार कर और परीक्षा व्यवस्था ठीक करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि एक ही भ्रष्ट और विवादित परीक्षा एजेंसी से क्यों बार-बार परीक्षाएं कराईं जा रहीं हैं।
छात्र अधिष्ठाता ने जूस पिलाकर तुड़वाया उपवास
शाम पांच बजे छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह और बीएचयू छात्र संघ के पूर्व महामंत्री डॉ. भूपेंद्र सिंह रिंटू ने जूस पिला कर छात्रों का उपवास तुड़वाया। पूर्व सदस्य छात्र परिषद अभिषेक कुमार सिंह ने कहा कि झारखंड के छात्रों की मांगों के समर्थन में उनके साथ मजबूती से खड़े हैं। छात्र नेता अभय सिंह ने कहा कि छात्रों को पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। कई विद्यार्थी चोटिल हुए। प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस छोड़े गए। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। छात्र नेता हर्ष त्रिपाठी ने कहा कि छात्र समुदाय की समस्याओं और मांगों को बातचीत और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। शिवम सोनकर ने कहा कि किसी भी आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई।