अंग्रेजी के अलावा देश के 10 भाषाओं की मदद से भोजपुरी लिपि को तैयार किया गया है। रमेश उपाध्याय ने बताया कि प्राकृत संस्कृत से ही भोजपुरी की भी उत्पत्ति हुई है। संस्कृत, असमी, फारसी, उर्दू, हिंदी आदि भाषाओं को पढ़ने और इसके उच्चारण के स्वरों अध्ययन करने के बाद कुल पांच माह में भोजपुरी लिपि को लिपिबद्घ किया है।