विज्ञान की राह आसान करेंगे तकनीक और साहित्य
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आईआईटी बीएचयू में शनिवार को 17वें विज्ञान कथा सम्मेलन के पहले दिन वक्ताओं ने विज्ञान के क्षेत्र में तकनीक और साहित्य के समायोजन की चर्चा करते हुए इसकी भूमिकाओं को अहम बताया। निदेशक प्रो. पीके जैन ने कहा कि तीनों के साथ होने से तकनीकी समस्याओं के समाधान की राह आसान होगी और भविष्य की चुनौतियों के निस्तारण में भी मदद मिलेगी।
मालवीय उद्यमिता संर्वधन केन्द्र (एमसीआईआईई), विज्ञान कथा समिति बंगलूरू और फैजाबाद के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले 17वें सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए निस्केयर दिल्ली के निदेशक डॉ. मनोज पटेरिया ने विज्ञान के क्षेत्र में सर्वांगीण विकास के लिए सभी को आगे आने का आह्वान किया।
विज्ञान कथाकार डॉ. श्री नरहरि ने कहा कि विभिन्न भाषाओं में विज्ञान कथा का लेखन चल रहा है और इस दिशा में काफी हद तक सफलता भी मिली है। दक्षिण कोरिया से किम बो यंग और ली सिहयों ने दक्षिण कोरिया में हो रहे विज्ञान कथा लेखन के बारे में बताया।
विज्ञान कथाओं को कोरियाई भाषा में अनुवाद पर बेस्ट अवार्ड पाने वाली किम बो ने अनुवाद को लेकर अपने अनुभव भी लोगों से साझा किए। विज्ञान कथा लेखक संघ, फैजाबाद के डॉ. राजीव रंजन उपाध्याय ने हिंदी में विज्ञान कथा लेखन के इतिहास, वर्तमान और भविष्य पर बोलते हुए भारतेंदू हरिश्चंद्र, राहुल सांकृत्यायन, डॉ. सम्पूर्णानन्द, आचार्य चतुर सेन शास्त्री आदि की कृतियों पर प्रकाश डाला।
बिना इंजेक्शन होगा दांत-मसूड़ों इलाज
अगर आपके दांतों, मसूड़ों में सूजन, कैंसर आदि की बीमारी है तो अब इलाज के दौरान न तो दर्द होगा और न ही अधिक खून गिरेगा। दंत चिकित्सा क्षेत्र में अब लेजर तकनीक से दर्द रहित उपचार संभव है। शनिवार को बीएचयू के दंत चिकित्सा संकाय में दो दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन वक्ताओं ने न केवल इस तकनीक की चर्चा की बल्कि ट्रॉमा सेंटर में इस तकनीक के माध्यम से मरीजों का उपचार भी किया। सभागार में नई तकनीक के उपचार का सजीव प्रसारण भी हुआ।
बीएचयू दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय और जिनेवा विश्वविद्यालय इटली के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने नई तकनीक को मरीजों के लिए उपयोगी बताया। जिनेवा विश्वविद्यालय से डॉ. एलेक्स मैथ्यू ने ट्रॉमा सेंटर के सभागार में इस तकनीक के बारे में बताया कि पहले मसूड़ों में कैंसर की जांच सहित अन्य बीमारियों के उपचार के दौरान इंजेक्शन लगाकर उस भाग को शून्य करना पड़ता था तब मसूड़े में से मांस काटना पड़ता था, इसमें खून अधिक बहने के साथ दर्द भी अधिक रहता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है।
लेजर तकनीक से अब उपचार आसान हो गया है। बिना इंजेक्शन लगाए मसूड़ों में होने वाली बीमारी का उपचार कर सकते हैं। यह दर्द और रक्त रहित है। चिकित्सा विज्ञान संस्थान निदेशक प्रो. वीके शुक्ला ने नई तकनीक को दंत चिकित्सा के क्षेत्र में सफल बताया।
बीएचयू में तीन दिवसीय वैदिक सम्मेलन शुरू
बीएचयू संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में शनिवार को तीन दिवसीय अखिल भारतीय वैदिक सम्मेलन में विद्वानों ने वैदिक भाषाओं के संरक्षण का आह्वान किया। मुख्य वक्ता प्रधानमंत्री के पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. ओमप्रकाश पांडेय ने कहा कि भारतीय संस्कृति और संस्कृत की पहचान वेद हैं, इनके संरक्षण के लिए सभी को आगे आना होगा।
स्वतंत्रता भवन में उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा कि वेद सभी ज्ञान का मूल हैं, लेकिन इनका प्रचार प्रसार नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सम्मेलन में मॉडर्न साइंस के लोगों को भी बुलाने का सुझाव दिया। अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. कमलेश दत्त त्रिपाठी ने कहा कि वेद भाषा विलुप्त होने के कगार पर हैं। आज जरूरत है कि वैदिक विद्वानों और मॉडर्न साइंस के वैज्ञानिक एक मंच पर आकर शोध करें।
बीएचयू कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह का संदेश पढ़ा। वीरूपाल बी जद्दीपाल ने कहा कि हमें वेदों को घर-घर स्थापित करना होगा। असम के राज्य मंत्री जयंत मल्लू बरुआ ने कहा कि देश की पहचान वेद और संस्कृति से ही है, लेकिन हम विदेशी संस्कृति धारण करते जा रहे हैं।
अतिथियों का स्वागत संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय प्रमुख प्रो. कौशल पांडे, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. उपेंद्र त्रिपाठी ने किया।