केस 1 : नियामताबाद विकासखंड के हिंदुवारी गांव निवासी सर्वेश कुमार ने बताया कि उनके बिजली खाते में पर्याप्त बैलेंस था, इसके बावजूद दो दिनों से उनका कनेक्शन कटा है। उनका कहना है कि वे दो दिनों से उपकेंद्र का चक्कर लगे रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। उन्होंने कर्मचारियों के व्यवहार पर भी सवाल उठाए।
केस 2 : पीडीडीयू नगर के चतुर्भुजपुर निवासी कुंजबिहारी मिश्र ने बताया कि पहले बैलेंस कम होने पर अलर्ट संदेश आता था, लेकिन इस बार बिना सूचना के बिजली काट दी गई। उन्होंने बताया कि मीटर में 2800 रुपये बकाया दिखा, मैंने 3000 रुपये जमा किए, लेकिन बिजली नहीं आई। बाद में मीटर माइनस में चला गया। फिर 500 रुपये और जमा करने पर आपूर्ति बहाल हुई।
केस 3 : पीडीडीयू नगर के लाखापुर गांव की कुसुम ने बताया कि उनके घर में बेटी की शादी है, किसी तरह पैसे जुटाकर शादी की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन स्मार्ट मीटर के कारण बिजली काट दी गई। पहले से अधिक बिल आने और एडवांस भुगतान की अनिवार्यता को उन्होंने अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया।
कैसे काम करता है स्मार्ट मीटर
विद्युत निगम के एसई जसमीर सिंह ने बताया कि स्मार्ट मीटर से बिलिंग में पारदर्शिता, सटीक ऑटोमैटिक रीडिंग और मोबाइल पर खपत की रियल-टाइम जानकारी मिलती है। प्रीपेड सुविधा के कारण समय पर रिचार्ज संभव होता है। इससे मानवीय त्रुटि, गलत बिलिंग और बिजली चोरी में कमी आती है। साथ ही बैलेंस कम होने पर उपभोक्ताओं को अलर्ट संदेश भेजे जाते हैं।
रिचार्ज के बाद आपूर्ति बहाली का दावा
एसई ने बताया कि उपभोक्ता यूपीपीसीएल स्मार्ट एप अपने मोबाइल में डाउनलोड करें, जिससे उन्हें बिल संबंधी सही जानकारी मिल सके। सामान्यत: रिचार्ज के दो घंटे के भीतर आपूर्ति बहाल हो जाती है। यदि ऐसा न हो तो 1912 पर कॉल या व्हाट्सएप के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। बैलेंस समाप्त होने पर तीन दिन का अतिरिक्त समय दिया जाता है।
पुराना बकाया होने पर समायोजन का प्रावधान
एसई ने बताया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर में रिचार्ज की गई राशि से पुराने बकाया का आंशिक समायोजन किया जाता है। 10 हजार रुपये तक के बकाया पर 10 प्रतिशत, 10 से 15 हजार पर 15 प्रतिशत, 15 से 20 हजार पर 20 प्रतिशत और 20 हजार रुपये से अधिक बकाया पर 25 प्रतिशत राशि काटकर समायोजित की जाती है।