इसलिए जिस सावन माह में चार सोमवार पड़ते हैं, उसमें महिलाएं एक सोमवार पहले यानी अषाढ़ के अंतिम सोमवार से ही व्रत आरंभ कर देती हैं और उसे पहला सोमवार माना जाता है। सोमवार को विभिन्न शिवालयों पर जलाभिषेक हुआ और दर्शन पूजन किया गया। शिवभक्तों ने 'जय भोलेनाथ' का उद्घोष करते हुए दर्शन-पूजन किया।
डुहिया के आचार्य पंडित दीनानाथ शुक्ल ने बताया कि जिस सावन में पांच सोमवार से कम पड़ते हैं, उस सावन में अषाढ़ के अंतिम सोमवार से ही महिलाएं व्रत आरंभ कर देती हैं।