गंगा घाट से लेकर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र का इलाका रात तक श्रद्धालुओं से पट गया। कांवरियों समेत बाबा भक्तों ने गंगा में डुबकी लगाई। जल पात्र भरा और कतार में लगते गए। उन्हें इंतजार था भोर में मंगला आरती के बाद मंदिर के पट खुलने का। इसमें पुरुषों के साथ ही महिलाएं व बच्चे भी शामिल थे। सावन का अंतिम सोमवार से ठीक पहले कांवरिया सेवा शिविरों में अधिक भीड़ थी। आधी रात से ही सुरक्षा व्यवस्था बाबा दरबार से लेकर गंगा घाट तक चुस्त दुरुस्त कर दी गई।
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आज बाबा का रूद्राक्ष शृंगार :
सावन के चौथे सोमवार बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ का रूद्राक्ष शृंगार किया जाएगा। सप्तर्षि आरती के बाद इस दिव्य झांकी के दर्शन किए जा सकेंगे। सावन के चारों सोमवार बाबा की अलग-अलग रूप में झांकी सजाई जाती है। इसमें पहले सोमवार भगवान श्रृंगार, दूसरे सोमवार प्रभु का माता पार्वती संग झांकी, तीसरे सोमवार अर्द्धनारीश्वर शृंगार किया गया था।