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शनि की दृष्टि से महिलाओं को दूर रहने की शंकराचार्य ने दी सलाह

Fri, 29 Jan 2016 02:00 AM IST
ब्यूरो, वाराणसी अमर उजाला
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ज्योतिष, द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने गुरुवार को कहा कि शनि भगवान नहीं, एक क्रूर ग्रह है जिसकी दृष्टि घातक होती है।
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शनि की दृष्टि क्रूर होने के साथ ही अमंगलकारी भी होती है। इससे महिलाओं को बचना चाहिए। महाराष्ट्र के शिंगड़ापुर में शनि मंदिर में प्रवेश के लिए आंदोलन चला रही महिलाओं को उन्होंने हठ छोड़ने की सलाह दी।
उन्होंने चुटकी ली कि अब तो बड़े नेता भी भगवान में विश्वास नहीं करते, ग्रहों के नाम पर अंगूठिया पहनने और राजनीति में आगे बढ़ने का उपाय जानने के लिए ज्योतिषियों की शरण में जाते हैं। यह सनातनी परंपरा के क्षरण का द्योतक है।
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केदार घाट स्थित श्रीविद्या मठ में दोपहर करीब एक बजे पत्रकारों से बातचीत में शंकराचार्य ने गंगा, गाय और परंपराओं से छेड़छाड़ पर चिंता जताई।
 कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार गंगा की निर्मलता के लिए कदम नहीं उठाना चाहती। जब तक गंगा पर प्रस्तावित बांधों को रद्द नहीं किया जाएगा, तब तक अविरलता-निर्मलता का सपना साकार नहीं हो सकता।
कहा कि गंगा के नाम पर पैसा तो खर्च किया जा रहा है लेकिन काम नहीं हो रहा है। अलकनंदा, भागीरथी की धाराओं पर प्रस्तावित बांधों से सरकारी ठेकेदारों को राजस्व मिल रहा है।
 यदि सरकार इससे मिलने वाले राजस्व के लोभ का त्याग कर गंगा को अविरल बहने दे तो समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी। गंगा के साथ सनातनधर्मी हिंदुओं के धार्मिक संबंध हैं।
गंगा की स्वच्छता के नाम पर सनातनधर्मियों पर प्रतिबंध लगाना हमारी परंपरा का विरोध है। गंगा में अस्थि विसर्जन हम नहीं रोक सकते।
एक अन्य सवाल पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार धर्म निरपेक्ष है, इसलिए वह अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं करा सकती। भाजपा राजनीतिक पार्टी है और आरएसएस एक संगठन।
ऐसे में यह भी मंदिर निर्माण नहीं करा सकते। राम जन्मभूमि की असली लड़ाई रामालय ट्रस्ट लडे़गा। रामलला जीत चुके हैं और अयोध्या में आने वाले दिनों में आराध्य राम के मंदिर का निर्माण कराया जाएगा।
शंकराचार्य ने शिंगणापुर में शनिदेव के मंदिर में प्रवेश को लेकर कुछ महिलाओं द्वारा आंदोलन चलाने को अनुचित बताया। कहा कि महिलाएं लक्ष्मी का स्वरूप होती हैं, उनको शनिदेव के सामने नहीं जाना चाहिए।
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 शनि की दृष्टि क्रूर और अमंगलकारी होती है। शनि भगवान नहीं, नौ ग्रहों में एक हैं। शनि और साईं के मंदिरों का निर्माण सनातन संस्कृति के चौपट करने के लिए हो रहा है।
 इस दौर में बड़े नेता भी अपने आराध्य देवों पर नहीं, ग्रहों पर विश्वास करने लगे हैं। इसके लिए जागरूकता की जरूरत है।
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