खदेड़े जाने के बावजूद जयगुरुदेव के दूसरे धड़े ने बाबा उमाकांत तिवारी के सत्संग को लेकर अभी हार नहीं मानी है। उमाकांत के अनुयायियों की सबसे बड़ी चिंता है उनके आठ सौ से अधिक गाड़ियों के काफिले के ठहराव को लेकर। वाराणसी में सत्संग की अनुमति न मिलने के बाद यह समस्या पैदा हुई है। शुक्रवार को पता चला कि आयोजकों की दूसरी टीम सारनाथ के निकट रजवाड़ी में काफिले के ठहराव की अनुमति के लिए पहुंच गई है। उनका कहना है कि अब सत्संग नहीं करेंगे लेकिन रात भर बाबा के रुकने के लिए उन्हें अनुमति दी जाए, ताकि अनुयायी बाबा के मिल सकें।
बाबा उमाकांत तिवारी 22 को बलिया में सत्संग के बाद दोपहर कार से रसड़ा होते हुए मऊ से गाजीपुर में प्रवेश करेंगे। वाराणसी में रजवाड़ी के पास उनके रात्रिविश्राम की व्यवस्था के लिए उनके अनुयायी जी तोड़ प्रयास में जुट गए हैं। बाबा के साथ 814 चार पहिया गाड़ियों का काफिला होगा। रजवाड़ी में रात्रि विश्राम की व्यवस्था के लिए अनुमति लेने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसके लिए चार सदस्यीय आयोजक मंडल की टीम शुक्रवा को दिन भर अफसरों से संपर्क साधने में जुटी रही। खुफिया विभाग के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। पता चला है कि वाहनों के लंबे काफिले के साथ ही एक हजार से अधिक बाइक सवार भी बाबा उमाकांत के साथ चल रहे हैं।
ऐसे में इतना बड़े काफिले को एक रात के लिए कहां रोका जाए, यह बड़ी चुनौती बन गया है। आयोजक मंडल के राम प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि हम प्रशासन से किसी तरह का टकराव नहीं करना चाहते। प्रशासन ने हमें सत्संग की अनुमति नहीं दी लेकिन हम चाहते हैं कि बाबा को रजवाड़ी के पास रात्रि विश्राम में प्रशासन सहयोग करे, ताकि बाबा सिर्फ रात बिता सकें। भोर में ही काफिला इलाहाबाद के लिए रवाना हो जाएगा। खुफिया विभाग का कहना है कि 24 को वाराणसी में पीएम मोदी का भी आगमन है। ऐसे में पीएम के दौरे को देखते हुए भी इस जमावड़े के लिए कोई सिरदर्द मोल नहीं लेना चाहता।