मेडिकल स्टोर संचालकों का कहना है कि कई जरूरी दवाएं स्टॉक में नहीं हैं और सप्लाई कब सामान्य होगी, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। दवा विक्रेता समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार ने बताया कि न्यूरो की दवाएं अपेक्षाकृत सस्ती होती हैं और डॉक्टर इन्हें मरीजों को 6 महीने से लेकर 2 वर्ष तक के लंबे समय के लिए लिखते हैं। लेकिन हाल ही में ड्रग विभाग की कार्रवाई के चलते स्टॉकिस्टों के पास न्यूरो दवाओं का स्टॉक लगभग खत्म हो गया है।
इन दवाओं की चल रही कमी
अल्प्राजोलाम, क्लोनाजेपाम, क्लोबाजाम, पिरासिटाम, ट्रामाडोल, फेंटानिल, मेथाडोन, नालट्रेक्सोन, जोल्पिडेम, ट्रिफ्लुपेराजिन, मेबवेरिन, एस्सिटलोप्राम, बुप्रेनॉर्फिन, क्लोरडायजेपॉक्साइड, नाइट्राजेपाम, एमिट्रिप्टिलीन, लोराजेपाम, डायजेपाम, प्रोपेनॉल आदि।
दवा विक्रेताओं का कहना है कि कंपनी स्तर से ही सप्लाई नहीं मिल रही है। विक्रेताओं ने बताया कि दवा कंपनियों को लग रहा है कि इन दवाओं का नशाखोरी के लिए प्रयोग हो रहा है। कोडीन कफ सिरप मामला सामने आने के बाद कंपनियों की ओर से सख्ती की जा रही है। इसलिए दवा एजेंसियों को बहुत जांच के बाद ही ऐसी दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसलिए इन दिनों इन दवाओं की भारी कमी हो गई है।
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केस-1
लहुराबीर निवासी 24 वर्षीय मयंक कुमार (बदला हुआ नाम) को मिर्गी की समस्या है। डॉक्टर के निर्देश पर वह पिछले एक साल से नियमित दवा ले रहे हैं। बुधवार को दवा खत्म होने पर जब वह मेडिकल स्टोर पहुँचे, तो पांच दवाएं लेने के लिए उन्हें तीन दुकानों के चक्कर लगाने पड़े।
केस-2
पांडेयपुर की 60 वर्षीय शीला देवी (बदला हुआ नाम) सिरदर्द की समस्या के कारण पिछले आठ महीनों से न्यूरो संबंधी दवाएं ले रही हैं। उनके बेटे को इस बार दवाएं जुटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई दुकानों पर स्टॉक खत्म मिलने के कारण उन्हें आधी-अधूरी दवाएं ही मिल पाईं।
क्या बोले अधिकारी
इस प्रकार की समस्या किसी दवा कारोबारी ने अभी तक नहीं बताई है। विभाग अपनी कार्यवाही कर रहा है। इस संबंध में दवा कारोबारियों से बात की जाएगी। -जुनाब अली, ड्रग इंस्पेक्टर