फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sonbhadra Mining Accident: खदान हादसे के लिए मेरी नहीं, मैनेजर की तय हो सकती है जवाबदेही; मालिक को मिली राहत

Thu, 11 Dec 2025 11:30 AM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र।

सार

Sonbhadra News: सोनभद्र जिले में खदान हादसे में खदान मालिक को बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनकी दलील पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। 
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सोनभद्र जिले के ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली-मारकुंडी में हुए खदान हादसे में खदान मालिक मधुसूदन सिंह को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने हादसे के एक मृतक के भाई की तरफ से दर्ज कराई गई प्राथमिकी को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी ओर से दलील दी गई कि मजदूरों की मौत उनकी वजह से नहीं हुई। यह खदान के मैनेजर की लापरवाही का मामला हो सकता है। इस पर कोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। वहीं, पक्षकारों से तीन हफ्ते के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है।
विज्ञापन


क्या है मामला
15 नवंबर को हुए खदान हादसे में सात मजदूरों की मौत हो गई थी। मामले में पनारी निवासी छोटू यादव की तहरीर पर खदान मालिक और उनके पार्टनर पर गैर इरादतन हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस की जांच में 10 नाम सामने आए थे। वहीं, माइंस मैनेजर सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। खदान मालिक सहित छह लोगों के हाजिर न होने पर अदालत से गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। 

इसे भी पढ़ें; मौत की डोर बना चाइनीज मांझा: बेटी को स्कूल से छोड़कर लौट रहे शिक्षक का कटा गला, तड़प- तड़पकर हुई मौत
विज्ञापन


अब इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से खदान मालिक को राहत मिल गई है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अचल सचदेव ने याचिका की सुनवाई की। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि याचिकाकर्ता (आरोपी) मेसर्स कृष्णा माइनिंग वर्क्स में पार्टनर है। खदान में काम करने वाले मजदूर की मौत उनके किसी काम की वजह से नहीं हुई। 
विज्ञापन

यह हादसा खदान के मैनेजर की लापरवाही का हो सकता है। तथ्यों-दलीलों को देखते हुए बेंच ने माना कि इस पर विचार करने की जरूरत है। इसके लिए पक्षकारों से तीन सप्ताह के भीतर जवाबी शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया गया। 

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई होने या पुलिस रिपोर्ट जमा होने तक, गिरफ्तार पर रोक लगा दी। कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता जांच में सहयोग करेगा। अगर वह ऐसा नहीं करता है तो पुलिस हाईकोर्ट में अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र होगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें