यह हादसा खदान के मैनेजर की लापरवाही का हो सकता है। तथ्यों-दलीलों को देखते हुए बेंच ने माना कि इस पर विचार करने की जरूरत है। इसके लिए पक्षकारों से तीन सप्ताह के भीतर जवाबी शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया गया।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई होने या पुलिस रिपोर्ट जमा होने तक, गिरफ्तार पर रोक लगा दी। कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता जांच में सहयोग करेगा। अगर वह ऐसा नहीं करता है तो पुलिस हाईकोर्ट में अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र होगी।