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Bhajan Sopori Death: ध्रुपद के मंच पर पहली बार हुई संतूर और गायन की जुगलबंदी

Fri, 03 Jun 2022 03:44 PM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

संकट मोचन संगीत समारोह और ध्रुपद मेले में पद्मश्री भजन सोपोरी  की प्रस्तुतियां हर किसी के लिए यादगार हैं।
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संतूर वादन करते पं. भजन सोपोरी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सन 2018 में ध्रुपद महोत्सव की निशा आज भी याद है, जब पद्मश्री भजन सोपोरी ने मंच से आवाज दी, आचार्य जी ऊपर आइए। लगा कि कोई काम होगा। जब हम मंच पर पहुंचे तो उन्होंने कहा कि आप गाइए और हम बजा रहे हैं। उनके अनुरोध पर हम लोगों ने पहली बार मंच पर संतूर और गायन की संगत की। श्रोताओं ने भी प्रस्तुति को खूब सराहा था। समझ लीजिए उन्होंने मेरी भावनाओं को सुरों में पिरो दिया।

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उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष पद्मश्री प्रो. राजेश्वर आचार्य की आंखें भजन सोपोरी को याद कर नम हो उठीं। संतूर के अनुपम सिद्ध कलाकार भाई भजन सोपोरी का अचानक यूं छोड़ जाना खाली खलेगा। शततंत्रीय के तार नहीं टूटे हैं उनको हृदय से चाहने वालों के हृदय के तार भी टूट गए हैं।

1982 में पहली बार उन्हें काशी में बुलाया था। सभी चकित थे उनके वादन से। लय, स्वर, राग ताल पर असाधारण अधिकार रखने वाले, स्वनामधन्य कलाकार। इस वादक ने साधक की उस कोटि को प्रमाणित किया था कि वाद्य ही नहीं बजता था जैसे लगता था कि स्वरआराध्य साक्षात होकर प्यार बांट रहे हैं। इसके बाद जो सिलसिला शुरू हुआ वह अनवरत जारी रहा।

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संतूर के संत का जाना दुखदायी

भजन सोपोरी 2020 में भी ध्रुपद महोत्सव में आए थे। लय और स्वर पर उनका प्रभुत्व था, उनका व्यवहार भी सरल था। संगीत जगत की यह बहुत बड़ी क्षति है। हम सभी मर्माहत हैं, भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।

संतूर के संत का जाना दुखदायी
संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने कहा कि उनके जाने से संतूर जगत में जो रिक्तता आई है उसकी भरपाई मुश्किल है। संतूर के संत का यूं चले जाना हर किसी को रुला गया। उनके साथ संगीत की लंबी यात्रा का साक्षी रहा हूं। संकट मोचन संगीत समारोह और ध्रुपद मेले में उनकी प्रस्तुतियां हर किसी के लिए यादगार हैं।
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संगीत जगत के सशक्त हस्ताक्षर थे भजन सोपोरी

पद्मश्री पंडित शिवनाथ मिश्रा ने कहा कि संगीत जगत के सशक्त हस्ताक्षर थे भजन सोपोरी। काशी से उनका गहरा लगाव था, संकट मोचन संगीत समारोह, शिवरात्रि संगीत समारोह, गंगा महोत्सव सभी जगहों पर अपनी छाप छोड़ी। 2011 में काशी में जब एक संगीत समारोह में भाग लेने आए थे तो हमारे भदैनी स्थित आवास पर भी उनका आगमन हुआ था। यहां युवाओं में संगीत के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए विस्तृत चर्चा हुई थी। उनका निधन हमारे लिए काफी दुखद है।
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