भजन सोपोरी 2020 में भी ध्रुपद महोत्सव में आए थे। लय और स्वर पर उनका प्रभुत्व था, उनका व्यवहार भी सरल था। संगीत जगत की यह बहुत बड़ी क्षति है। हम सभी मर्माहत हैं, भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
संतूर के संत का जाना दुखदायी
संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने कहा कि उनके जाने से संतूर जगत में जो रिक्तता आई है उसकी भरपाई मुश्किल है। संतूर के संत का यूं चले जाना हर किसी को रुला गया। उनके साथ संगीत की लंबी यात्रा का साक्षी रहा हूं। संकट मोचन संगीत समारोह और ध्रुपद मेले में उनकी प्रस्तुतियां हर किसी के लिए यादगार हैं।
पद्मश्री पंडित शिवनाथ मिश्रा ने कहा कि संगीत जगत के सशक्त हस्ताक्षर थे भजन सोपोरी। काशी से उनका गहरा लगाव था, संकट मोचन संगीत समारोह, शिवरात्रि संगीत समारोह, गंगा महोत्सव सभी जगहों पर अपनी छाप छोड़ी। 2011 में काशी में जब एक संगीत समारोह में भाग लेने आए थे तो हमारे भदैनी स्थित आवास पर भी उनका आगमन हुआ था। यहां युवाओं में संगीत के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए विस्तृत चर्चा हुई थी। उनका निधन हमारे लिए काफी दुखद है।