राज्यपाल एवं कुलाधिपति राम नाईक ने विश्वविद्यालयों के साथ ही शिक्षकों और छात्रों को परिश्रम, प्रमाणिकता तथा पारदर्शिता बनाए रखने की बात कही। वह सोमवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 34वें दीक्षांत समारोह को मोबाइल फोन से संबोधित कर रहे थे। खराब मौसम के चलते समारोह में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने विश्वविद्यालयों को शोध की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देने को कहा। समारोह में 32 मेधावियों में 56 पदक, 28661 को उपाधियां बांटी गई। इसमें दो डीलिट भी शामिल हैं। आचार्य व्याकरण के छात्र सर्वेश तिवारी आठ पदक के साथ टॉपर बने। जापान की तोशिको ईदाका को पांच पदक मिले।
कुलाधिपति ने कहा कि यह पहला अवसर है, जब प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह दिसंबर तक हो गया है। विश्वविद्यालय का मुख्य काम बेहतर शिक्षा और नकल विहीन परीक्षा कराना है। विश्वविद्यालय में भगवत गीता, रामायण आदि धार्मिक ग्रंथों पर भी शोध होना चाहिए।
मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि देश की संस्कृति-सभ्यता की दृष्टि से भारत के बराबर कोई और देश नहीं है। संस्कृति वही है, जो संस्कृत पर आधारित हो और संस्कृत वह है जो संस्कृति को प्रतिष्ठापित करता है। सभ्यता और संस्कृति का जिस तरह से क्षरण हो रहा है, उसके लिए वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
काशी विद्यापीठ के कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग ने मेधावियों को बधाई देते हुए कहा कि आज के बाद जिम्मेदारी बढ़ गई हैं, इसे निभाने के लिए सदैव तत्पर रहना होगा। अतिथियों का स्वागत कुलपति प्रो. यदुनाथ प्रसाद दूबे ने किया। संचालन प्रो. रजनीश शुक्ल और धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव प्रभाष द्विवेदी ने किया। पहली बार किसी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में एक साथ तीन विश्वविद्यालयों के कुलपति एक मंच पर दिखे।