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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय: आचार्य की डिग्री वाले अभ्यर्थी भी कर सकेंगे संस्कृत प्रवक्ता पद का आवेदन

Thu, 08 Oct 2026 02:26 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आचार्य की डिग्री वाले अभ्यर्थी भी संस्कृत प्रवक्ता पद का आवेदन कर सकेंगे। संस्कृत विश्वविद्यालय की आचार्य की डिग्री स्नातकोत्तर उपाधि है। इसे लेकर माध्यमिक शिक्षा अनुभाग ने आदेश जारी किया। 
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से जारी आचार्य (संस्कृत) उपाधि स्नातकोत्तर उपाधि है। उपाधि पाने वाले अभ्यर्थी संस्कृत प्रवक्ता पद पर आवेदन कर सकेंगे। आवेदन में किसी तरह की कठिनाई नहीं होगी। माध्यमिक शिक्षा अनुभाग की ओर से आदेश जारी कर दिया गया है। इस आदेश से अभ्यर्थियों को बड़ी राहत होगी।

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उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से इन दिनों प्रवक्ता (संस्कृत) पद के लिए आवेदन की प्रक्रिया चल रही है। संस्कृत विश्वविद्यालय से आचार्य की डिग्री पाने वाले विद्यार्थियों को प्रवक्ता पद आवेदन भरने में परेशानी हो रही थी। शासनादेश के अनुसार प्रवक्ता (संस्कृत) पद के लिए प्रकाशित विज्ञापन में निर्धारित शैक्षिक अर्हता को लेकर असमंजस की स्थिति थी। माध्यमिक शिक्षा अनुभाग की ओर से जारी आदेश के बाबत संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप से अब भ्रम दूर हो गया। 

आदेश में कहा गया है कि संस्कृत विश्वविद्यालय से निर्गत आचार्य (संस्कृत) विषय की उपाधि स्नातकोत्तर उपाधि है। अभ्यर्थियों को 15 सितंबर 2026 के विज्ञापन के तहत प्रवक्ता (संस्कृत) पद के लिए आवेदन करने में कोई कठिनाई नहीं है। 

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कुलपति ने बताया कि इस विषय को आयोग के अध्यक्ष, माध्यमिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष उठाया गया। संवाद में स्पष्ट हुआ कि विज्ञापन में उत्पन्न स्थिति किसी प्रकार की नीतिगत असहमति या संस्कृत की उपेक्षा का परिणाम नहीं थी, बल्कि विज्ञापन की भाषा, शब्दावली अथवा कार्यालयीय स्तर पर हुई भ्रांति के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई थी।
 
विज्ञापन में उत्पन्न यह भ्रामक स्थिति किसी प्रकार की नीतिगत असहमति या संस्कृत की उपेक्षा का परिणाम नहीं थी, बल्कि विज्ञापन की भाषा, शब्दावली अथवा कार्यालयीय स्तर पर हुई भ्रांति के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई थी। मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप से भ्रम दूर हो गया। -प्रो. बिहारी लाल शर्मा, कुलपति, संपूर्णानंद संस्कृत विवि 
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