कुलपति ने बताया कि इस विषय को आयोग के अध्यक्ष, माध्यमिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष उठाया गया। संवाद में स्पष्ट हुआ कि विज्ञापन में उत्पन्न स्थिति किसी प्रकार की नीतिगत असहमति या संस्कृत की उपेक्षा का परिणाम नहीं थी, बल्कि विज्ञापन की भाषा, शब्दावली अथवा कार्यालयीय स्तर पर हुई भ्रांति के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई थी।
विज्ञापन में उत्पन्न यह भ्रामक स्थिति किसी प्रकार की नीतिगत असहमति या संस्कृत की उपेक्षा का परिणाम नहीं थी, बल्कि विज्ञापन की भाषा, शब्दावली अथवा कार्यालयीय स्तर पर हुई भ्रांति के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई थी। मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप से भ्रम दूर हो गया। -प्रो. बिहारी लाल शर्मा, कुलपति, संपूर्णानंद संस्कृत विवि