सुधीर गौतम ने बंशी वादन और तबले पर सहयोग पं. ललित कुमार का रहा। अतुल शंकर ने श्रीराम चंद्र कृपालु भजमन की सुमधुर प्रस्तुति दी। इसके बाद अगली प्रस्तुति बनारस घराने के प्रसिद्ध क लाकार गणेश प्रसाद मिश्र की रही। उन्होंने राग रागेश्वरी में पहली रचना कान्हा बांसुरी वाला, दूसरी रचना तीन ताल में प्रभु गुन गाओ रे तू मन..., के बाद बनारसी चैती चैत मासे सैयां नहीं अइले हो रामा जिया घबराए की प्रस्तुति दी।
इसी क्रम में ठुमरी ना मानूंगी ना मानूंगी उनके मनाए बिना... पेश किया। इसके बाद पं. राजन मिश्र को समर्पित धन्य भाग सेवा का अवसर पाया... सुनाकर श्रद्धासुमन अर्पित किया। तबला वादन के माध्यम से सिद्धांत मिश्र ने सहयोग प्रदान किया। अंतिम प्रस्तुति पं. सुखदेव प्रसाद मिश्र के वायलिन वादन की रही। उन्होंने वायलिन वादन के माध्यम से प्रभु चरणों में शीश नवाया। उन्होंने राग मालकौंस में आलाप जोड़ एवं झाला की पारंपरिक प्रस्तुति दी। तबले पर पं. किशोर कुमार मिश्र ने संगत की। तकनीकी विशेषज्ञ अंकित श्रीवास्तव, अनुराग और हर्षित श्याम जायसवाल ने तकनीकी रूप से सहयोग किया। संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया।
प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र, महंत, संकटमोचन मंदिर।
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पं. जसराज हर साल अर्पित करते थे स्वरांजलि
संगीत मार्तंड पद्मविभूषण स्व. पं. जसराज जी उन कलाकारों में से थे जो हर वर्ष भगवान को अपनी स्वरांजलि अर्पित करते थे। पिछले वर्ष उन्होंने दो बार हनुमान जन्मोत्सव और संगीत समारोह के दिन अपनी आस्था अमेरिका केन्यू जर्सी से भगवान के चरणों में अर्पित की थी। जब वह इस वर्ष नहीं हैं तो श्रोताओं के कहने पर उनका यादगार अंतिम वीडियो चलाया गया। - प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र, महंत, संकटमोचन मंदिर