संकटमोचन संगीत समारोह की पांचवीं निशा गायन, वादन और नृत्य की सुमधुर प्रस्तुतियों से सजी। बीच-बीच में तकनीकी समस्या के कारण कलाकारों से संपर्क टूट जाने से थोड़ा दर्शक परेशान हुए, लेकिन हनुमत लला के चरणों में अभ्यर्थना की असीम उत्कंठा ने हर किसी को देर रात तक बांधे रखा।
बुधवार को पांचवीं निशा की प्रथम प्रस्तुति में चेन्नई से बाहुबली फेम दीपिका वरदराजन ऑनलाइन जुड़ीं। उन्होंने सिर्फ तानपुरे के साथ संकटमोचन के चरणों में अपने सुमधुर स्वरों की श्रद्धा अर्पित की। दीपिका के गायन के दौरान तकनीकी खराबी से संपर्क टूट गया। तकनीकी टीम के सदस्यों की मेहनत से 10 मिनट में दोबारा सुमधुर स्वरों की खनक सुनाई दी। मां से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद पद्मभूषण सुधा रघुनाथन से गायन की शिक्षा लेने वाली वाली दीपिका ने कार्यक्रम का शुभारंभ पुरंदर दास द्वारा संगीतबद्ध श्लोक श्रीरामचंद्र श्रुत पारिजात... से किया। राग नाटा में निबद्ध इस रचना के बाद इसी राग में निबद्ध त्यागराज स्वामी की रचना सीतानाथ सकल लोक पालक...की प्रस्तुति दी।
इसके उपरांत त्यागराजन स्वामी की तमिल रचना राग हंसनादम् में सुनाई जो आदि ताल में निबद्ध थी। राग सीमेंद ्रमध्यम और मिश्रचापु ताल में पिरोई स्वामी वासुदेवाचार्य की तेलुगु रचना के बाद ठुमरी झूले मोरा सईयां लूं मैं बलइया... से समापन किया। दूसरी प्रस्तुति में भोपाल से अनुराधा सिंह ने कथक नृत्य की सधी हुई प्रस्तुति से दर्शकों की वाहवाही हासिल की। शिव वंदना से नृत्य का आरंभ करने के बाद उन्होंने तीन ताल में कथक पेश किया। इस दौरान वायलिन और घुंघरुओं की जुगलबंदी को दर्शकों ने सबसे अधिक सराहा। राग हंसध्वनि में तराना पर आकर्षक नृत्य करने के बाद उन्होंने राग कलावती में निबद्ध ठुमरी पर भावनृत्य से समापन किया।
इसके पूर्व मंगलवार को चौथी निशा में मुंबई से गार्गी सिद्धांत ने भजन की प्रस्तुति दी। उन्होंने श्री राम चंद्र कृपालु भजमन से आरंभ किया और राम गोविंद हरि...से समापन किया। संगीत शृंखला को आगे बढ़ाते हुए सरोद वादन की प्रस्तुति के लिए नई दिल्ली से विख्यात कलाकार पंडित विश्वजीत राय चौधरी जुड़े। उन्होंने राग शुद्ध कल्याण में आलाप, जोड़ एवं झाला की प्रस्तुति दी। मध्य रात्रि में विख्यात गजल गायक सलीम अल्लाहवाले भोपाल से जुड़े। उन्होंने रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ..., आज जाने की जिद ना करो...पर श्रोताओं को रुमानियत का अहसास कराया।
इसके बाद बनारस घराने के युवा कलाकार सौरव गौरव मिश्र ने कथक की प्रस्तुति दी। उन्होंने राम भजन से नृत्य आरंभ किया और उसके बाद बनारस घराने की परंपरागत तिहाई, तोड़ा, टुकड़ा एवं चक्करदार की प्रस्तुति दी। तबले पर प्रीतम मिश्रा, गायन व हारमोनियम पर संतोष मिश्र व सितार पर पं. धु्रव नाथ मिश्र ने सहयोग किया। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति गायन की रही। कोलकाता से मीनाक्षी मजूमदार ने श्री संकट मोचन मंदिर के नादलीन महंत पंडित अमरनाथ मिश्र की अमर कृति भवानी दयानी...राग भैरवी में प्रस्तुत किया।