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'अमर उजाला संवाद' में संजय दत्त ने इन सवालों का बेबाकी से दिया जवाब

Thu, 14 Sep 2017 03:09 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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‘भूमि’ के साथी कलाकारों अदिति राव हैदरी और शेखर सुमन के साथ संजय दत्त - फोटो : अमर उजाला
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फिल्म अभिनेता संजय दत्त किसी भी फिल्म की कमाई को सफलता का पैमाना नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि उनका इसमें कोई यकीन नहीं है। प्रोड्यूसर की रिकवरी हो जाए, उसे प्रॉफिट मिल जाए और दर्शक फिल्म देखकर खुश हो जाएं, इससे मुझे अपार खुशी मिलती है।
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फिल्म दर्शकों को कितनी पसंद आई, यह सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। 150-200 करोड़ की कमाई जैसे आंकड़ों पर मैं कभी नहीं जाता। अगर फिल्म लोगों को पसंद आ जाए तो मेरे लिए संतोष की बात होती है। मैंने हमेशा इसी सोच को लेकर फिल्में की हैं।

जब भी मुझे कोई कहानी मिलती है तो मैं इसे दर्शकों से कनेक्ट जरूर करता हूं। ‘अग्निपथ’ भी अचानक मिल गई थी और रोल पसंद आने के कारण ही की थी।
 
अपनी कम बैक फिल्म ‘भूमि’ के साथी कलाकारों अदिति राव हैदरी और शेखर सुमन के साथ संजय दत्त बुधवार को अमर उजाला के चांदपुर इंडस्ट्रियल इस्टेट स्थित कार्यालय में ‘अमर उजाला संवाद’ में मौजूद थे।
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‘संजू बाबा’ ने इस दौरान अपने माता-पिता का स्मरण किया। 36 साल पहले होम प्रोडक्शन ‘राकी’ के लिए 50 हजार रुपये का पारिश्रमिक मिलने की जानकारी देते हुए ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ को अपने फिल्मी सफर की यादगार और पसंदीदा फिल्म करार दिया।

करीब आधा घंटा चले सवाल-जवाब के सिलसिले के संपादित अंश यहां प्रस्तुत हैं।
 

‘मैं संजय दत्त हूं’, कोई नंबर नहीं

‘अमर उजाला संवाद’ - फोटो : अमर उजाला
आप सुपर स्टार रह चुके हैं। बॉलीवुड में सुपर स्टार्स में नंबर की होड़ रहती है। अब खुद को इनमें से कहां देखते हैं?
पहली बात ‘मैं संजय दत्त हूं’, कोई नंबर नहीं। दूसरे, मैंने शुरूआत से अब तक अपने को इस दौड़ से बाहर रखा है। मैं इस पर विश्वास नहीं करता। मैं सिर्फ एक्टर हूं। कहानी सुनता हूं, जो अच्छी लगती है, उसे पूरे मन से करता हूं। बाकी दर्शकों के ऊपर है कि वह मेरे बारे में क्या सोचते हैं। भाई, मैं जो हूं, जैसा हूं, वैसा ही अच्छा हूं पर सुपर स्टार नहीं। 

लोग आपकी रफ-टफ स्टाइल और फिटनेस के दीवाने है। फिल्मों में अपना भविष्य तलाश रहे न्यू कमर्स के लिए फिटनेस कितनी जरूरी है?
यह उनकेऊपर डिपेंड करता है कि वह क्या चाहते हैं। हालांकि न्यू कमर्स के लिए फिटनेस जरूरी है लेकिन सबसे जरूरी है कि अभिनय। अगर बॉडी-साडी बना भी लिया और एक्टिंग नहीं आती है तो फिर क्या मतलब। फिटनेस होनी चाहिए पर एक्टिंग तो जरूरी है।

पिता सुनील दत्त की ऐसी कौन सी फिल्म है, जिसके रीमेक में आप खुद लीड रोल करना चाहेंगे?
अब लीड रोल की उम्र नहीं रही (मुस्कुराते हुए)। मगर, मौका मिला तो दत्त साहब की ‘मुझे जीने दो’ में जरूर काम करना चाहूंगा। यह गजब फिल्म है। (इसी दौरान शेखर सुमन ने कहा कि मैं भी बस इसी फिल्म का नाम लेने जा रहा था। ऐसी फिल्में बड़ी ही मुश्किल से बनती है।) 

सुनील दत्त के बाद आपने वैरायटी एक्टर के रूप में वॉलीबुड में लंबा सफर तय किया है। ढेर सारे किरदार बेहतरीन ढंग से निभाए। क्या कोई ऐसा किरदार बाकी है, जिसके लिए मन में ललक हो?
(सोच कर ठहाका लगाते हुए) ये बताना इतना आसान नहीं। मुझे इसका जवाब देने के लिए एक हफ्ते तक सोचना पड़ेगा। 

अपनी अगली फिल्म ‘मलंग’ के बारे में बताना चाहेंगे?
मैं बनारस दोबारा आना चाहता हूं। ‘मलंग’ एक सस्पेंस थ्रिलर मूवी है। यह पूरी तरह से बनारस पर आधारित है। इस फिल्म की शूटिंग दिसंबर से फरवरी तक वाराणसी के विभिन्न लोकेशन पर प्रस्तावित है। यह एक अनोखी लव स्टोरी है और इसमें बनारस का एक अलग ही रंग, खूबसूरती और संस्कृति रुपहले पर्दे पर देखने को मिलेगी।

आपका पूरा परिवार राजनीति से जुड़ा रहा है। पिता सुनील दत्त के बाद उस विरासत को बहन प्रिया दत्त ने संभाला। फिर राजनीति में आना चाहेंगे? 
राजनीति में कदम रखकर भाग चुका हूं। देख भी चुका हूं। यह क्षेत्र मुझे कतई रास नहीं आया है। आगे भी राजनीति नहीं करनी है। मैं एक अच्छा एक्टर ही रहना चाहता हूं। अब और कुछ भी नहीं बनना चाहता।  
 
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खाकी पहने महिला हमारी मां-बेटियों का हौसला है

संजय दत्त ने 1090 सेवा की तारीफ की - फोटो : अमर उजाला
संजय दत्त ने यूपी पुलिस की वीमेन पावरलाइन 1090 की जानकारी ली। वाराणसी आने से पहले संजय दत्त ने अमर उजाला से 1090 के लिए काम करने वाली महिला पुलिस कर्मियों से मिलने की खास इच्छा जाहिर की। उनके अनुरोध पर वाराणसी पुलिस के महिला पुलिस जत्थे से संजय दत्त की मुलाकात हुई।  

क्षेत्राधिकारी सदर अंकिता सिंह ने संजय दत्त को बताया कि किशोरियां और महिलाएं किसी भी आपात स्थिति में 1090 पर फोन कर सकती हैं। पीड़िता की शिकायत को महिला पुलिसकर्मी सुनती हैं। इसके बाद पीड़िता के पास उनके नजदीकी थाने की फोर्स को भेज कर समस्या का समाधान कराया जाता है।

क्षेत्राधिकारी सदर से मिली जानकारी पर संजय दत्त ने 1090 सेवा की तारीफ की और शिकायतें सुनकर उनका समाधान कराने वाली पुलिसकर्मियों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। कहा- वैसे तो खाकी कोई भी पहने एक आम ईमानदार इंसान को उससे सुरक्षा महसूस होती है।

लेकिन, खासतौर से जब घर की महिलाएं और बेटियां बाहर होती हैं और किसी लड़की को खाकी पहने देखती हैं तो उनका आत्मविश्वास दोगुना हो जाता है। इस दौरान सब इंस्पेक्टर मीरा यादव, श्यामा तिवारी, रीता देवी व गीता यादव और कांस्टेबल गीता भारती, अर्चना पाल, सीमा सिंह, गुंजा कन्नौजिया व सरस्वती मौजूद रहीं। संजय दत्त ने महिला पुलिसकर्मियों के साथ सेल्फी भी खिंचवाई।

(प्रदीप मिश्र, कौशल किशोर, आशुतोष द्विवेदी, अनूप ओझा, आलोक त्रिपाठी, पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, जयेंद्रनाथ चतुर्वेदी और उत्पल कांत से बातचीत पर आधारित)
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