राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक मोहन भागवत ने पड़ोसी देशों को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि भारत सिर्फ जमीन का टुकड़ा भर नहीं है। इसे छोटा-बड़ा नहीं किया जा सकता है। भारत ने किसी दूसरे देश पर आक्रमण नहीं किया है। दूसरे देशों ने हम पर हमला किया है।
हम हमेशा दूसरों को देते रहे हैं लेकिन इसे हमारी कमजोरी न समझा जाए। आर्थिक, सामरिक और नैतिक दृष्टि से भारत सिरमौर रहा है। यहां के लोग जहां भी गए सभ्यता और संस्कृति का विस्तार किया। भारत ने आयुर्वेद, गणित और विज्ञान दिया है।
काशी प्रवास के चौथे दिन संघ प्रमुख रविवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित संघ समागम को संबोधित कर रहे थे। संघ प्रमुख ने गांवों तक शाखाओं का विस्तार करने की भी बात की।
कहा, संख्या के साथ साथ समाजा निर्माण के ध्येय की पूर्ति होनी चाहिए। संघ प्रमुख ने भारत की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए राष्ट्र निर्माण के लिए युवाओं से योगदान देने का आह्वान किया। भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि चीन से हमारी नोंकझोंक जब-तब चलती रहती है। ऐसे वातावरण के बावजूद हमारे एक साथी चीन के शितो मंदिर गए।
वहां एक बुजुर्ग महिला दर्शन कर रही थीं। दर्शन के बाद वह पीछे खड़े साथी के पास गईं और पूछा कि तुम भारतीय हो। साथी ने हां में जवाब दिया। इसके बाद उसे महिला ने साथी के चरण स्पर्श किए। इससे पता चलता है कि भारत के प्रति विदेश में कितना आदर है।
एक और उदाहरण दिया। दुबई में व्यापारियों की बैठक हो रही थी। वहां एक मंत्री को व्यापारियों ने रात में बुलाया और कहा कि बाकी देशों से हम करार करेंगे तो दांव-पेच होगा। भारत से करार करेंगे तो निश्चिंत हो जाएंगे। कम टेंडर भरने का आग्रह किया।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के संघ समागम में काशी महानगर के स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। ध्वज प्रणाम के साथ प्रार्थना हुई। एकल गीत एक बार करवट तो बदले...के अलावा स्वयंसेवकों ने दंड का प्रदर्शन किया। इसके पूर्व बड़ा लालपुर के दीनदयाल हस्तकला संकुल में दो सत्रों में हुई बैठक में संगठनात्मक चर्चा हुई।