यहां बता दें कि काशी के अर्द्धचंद्राकार घाटों पर गंगा से बढ़ते दबाव को कम करने के लिए गंगा पार रेती की ओर नहर बनाने की परियोजना बनाई गई। इसमें 45 मीटर चौड़ी नहर से गंगा में बनाकर गंगा के प्रवाह को समान किया जाना है।
मगर, सिंचाई विभाग ने 11.95 करोड़ रुपये की इस परियोजना की जिम्मेदारी यूपीपीसीएल की बलिया इकाई को दी गई और इसका एमओयू (समझौता पत्र) सिंचाई विभाग की बंधी खंड से किया गया। बंधी खंड को इस एमओयू की प्रति तक नहीं दी गई और उसे इस परियोजना में शामिल ही नहीं किया गया।
जुलाई महीने में आई बाढ़ में नहर की मिट्टी गंगा में समा कर पूरी परियोजना गंगा की धारा में बह गई। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने कहा कि गंगा में बाईपास नहर परियोजना को रिस्टोर करने के लिए यूपीपीसीएल को निर्देश दिया गया है। शासन को भी पूरी रिपोर्ट भेजी गई है और वहां से जांच शुरू कराई गई है।