विश्वविद्यालय की स्थापना सन 1791 में हुई थी। 22 मार्च 1958 को तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानंद के प्रयत्न से इसे विश्वविद्यालय का स्तर प्रदान किया गया। उस समय इसका नाम वाराणसेय संस्कृत विश्वविद्यालय था। सन् 1974 में इसका नाम बदलकर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय रख दिया गया।
विश्वविद्यालय में काशी नरेश महीप नारायण सिंह, जे म्योर, डॉ. जेआर वलेंटाइन, आरटीएच ग्रिफिथ, महा महोपाध्याय डॉ. गंगाधर झा, पं. गोपीनाथ कविराज, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानंद एवं पूर्व मुख्यमंत्री पं. कमलापति त्रिपाठी ने योगदान किया है।