कड़ी सुरक्षा व गहमागहमी के बीच छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान सुबह नौ बजे से शुरू हुआ। छात्रों को नियंत्रित करने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई बार पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा। फर्जी वोटिंग को लेकर कुछ देर तक छात्रों ने हंगामा भी किया। मतदान दोपहर दो बजे तक चला। छात्रों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। चुनाव अधिकारी प्रो. सुधाकर मिश्र ने बताया कि मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। चुनाव में 44.51 फीसदी प्रत्याशियों ने मतदान किया।
लोट-लोटकर मांग रहे थे वोट
चुनाव के लिए छात्रसंघ प्रत्याशी लोट-लोटकर वोट मांग रहे थे। कोई मतदाताओं के पैर पकड़कर लोट रहा था तो कोई हाथ जोड़ रहा था। परिसर में परिचय पत्र व फीस रसीद देखने के बाद ही छात्रों को मतदान स्थल तक जाने की छूट दी जा रही थी। मतदान के दौरान शक्ति प्रदर्शन का आलम यह था कि पंफलेट से सड़क पट गई थी। वहीं समर्थकों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को उन्हें कई बार खदेड़ना पड़ा। सहित्य संस्कृति संकाय व दर्शन संकाय प्रतिनिधि पहले ही निर्विरोध चुन लिए गए थे। आधुनिक ज्ञान विज्ञान संकाय प्रतिनिधि के लिए एक भी छात्र ने नामांकन नहीं किया था।
प्रत्याशियों को मिले इतने वोट
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव ने एबीवीपी की सारी रणनीति को फेल कर दिया। काशी विद्यापीठ के बाद संपूर्णानंद में भी एबीवीपी का खाता तक नहीं खुल सका। छात्रों ने एबीवीपी को सिरे से नकारते हुए एनएसयूआई पर अपना भरोसा जताया।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव में जीत के लिए एबीवीपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। यही नहीं विश्वविद्यालय परिसर में एबीवीपी के अलावा कई बड़े भाजपा नेता भी प्रत्याशियों को अपने पक्ष में करने के लिए लगातार पहुंच रहे थे।
बावजूद इसके छात्रों ने एनएसयूआई के पैनल पर अपना भरोसा दिखाया। वहीं काशी विद्यापीठ में भी एबीवीपी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। यूपी कांग्रेस के नेताओं ने भी ठीक पंचायत चुनाव से पहले मिली इस जीत को अहम बताते हुए विजयी प्रत्याशियों को बधाई दी है।
पूर्व विधायक अजय राय ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई की जीत युवाओं के बदलते नजरिए का संकेत है। एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव अविनाश यादव ने कहा कि छात्रों ने मुद्दा मूलक राजनीति को चुना और बरगलाने वालों को नकार दिया है। प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि सूबे के युवाओं ने नफरत की राजनीति को नकार दिया है। उनके मुद्दों पर बात करने वाली एनएसयूआई को चुना है। यह सूबे में नई राजनीति की शुरूआत है।