सुरक्षा एजेंसी के साथ मिलकर किया गया गबन
विश्वविद्यालय में सुरक्षा के लिए अनुबंधित की गई सुरक्षा एजेंसी के साथ मिलकर लाखों रुपये का घोटाला किया गया था। ऑडिट टीम और विश्वविद्यालय की जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितता की बात कही थी। बताया था कि बिना किसी सक्षम अधिकारी के सत्यापन के ही 24 लाख रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया गया। यह तो केवल तीन महीने का आंकड़ा था, दो साल में कितने भुगतान हुए होंगे इसकी भी जांच होनी चाहिए।
जानबूझकर किया गया अनियमित भुगतान
विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रो. राम किशोर त्रिपाठी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि सुरक्षा संविदा कर्मियों के भुगतान में वित्तीय नियमों और अनुबंध की शर्तों का खुला उल्लंघन किया गया। इसमें तत्कालीन विनयाधिकारी, सुरक्षाधिकारी, लेखानुभाग और सुरक्षा एजेंसी की संलिप्तता है।
जानबूझ कर किए गए अनियमित भुगतान से विश्वविद्यालय को लाखों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंची। वहीं, आडिट विभाग इलाहाबाद के उपनिदेशक एसपी चौरसिया ने जांच रिपोर्ट में कहा था कि लेखानुभाग की ओर से वांछित अभिलेख मूलरूप में नहीं उपलब्ध कराए गए। ऐसे में सभी भुगतान का परीक्षण संभव नहीं हो सका। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर परीक्षण में भारी वित्तीय अनियमितताएं मिलीं। लेखानुभाग की ओर से दिसंबर 2016, सितंबर 2017, अक्तूबर 2017 और मार्च 2017 से फरवरी 2018 तक के भुगतान से संबंधित कागजात उपलब्ध ही नहीं कराए गए।
सुरक्षा एजेंसी की गई ब्लैक लिस्टेड
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने बांबे सिक्योरिटी कंसल्टेंसी एवं सर्विसेज को ब्लैक लिस्टेड कर दिया है। इसी सुरक्षा एजेंसी ने 11 अप्रैल 2016 से फरवरी 2018 तक विश्वविद्यालय में सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाई थी। सुरक्षा एजेंसी का अनुबंध 10 अप्रैल 2017 में समाप्त होने के बाद भी एजेंसी ने फरवरी 18 तक काम किया था।