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कुलसचिव ने लिया होता संज्ञान तो गिरफ्त में होते जालसाज

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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करने के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की भी लापरवाही सामने आई है। पीड़ितों ने अपने शिकायती पत्र में यह जिक्र किया है कि उन्होंने कुलसचिव को फरवरी में ही पूरे मामले की जानकारी दी थी लेकिन उन्होंने हम लोगों को ही डांटकर भगा दिया था। हम लोग डर के मारे वापस चले आए।
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आगरा के शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी गई तहरीर में कहा है कि जब जालसाज हम लोगों की नियुक्ति को लेकर टालमटोल करने लगे तो हम लोगों ने 23 फरवरी को कुलसचिव को फोन करके वास्तविकता जाननी चाहिए। हम लोगों ने उनके ह्वाट्सएप नंबर पर जानकारी लेने की कोशिश की। उन्होंने हम लोगों की मदद करने की बजाय बोले कि यह फर्जी डाक्यूमेंट्स लेकर घूम रहे हो। आप लोगों के खिलाफ 420 का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। हम लोगों ने जब यह सुना तो डर गए कि हमारा तो अब पैसा भी चला गया और ये लोग हमें ही जेल भेजने की बात कर रहे हैं। चीफ प्राक्टर प्रो. आशुतोष मिश्रा का कहना है कि पूरे मामले की जांच चल रही है। पुलिस भी अपने स्तर से जांच कर रही है। जल्द ही मामले का खुलासा होगा।
फर्जी वेबसाइट की मिली एबीसी टावर से जानकारी
पीड़ितों ने बताया कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की फर्जी वेबसाइट के बारे में पड़ताल करने के लिए हम लोग एबीसी टावर स्थित सॉफ्टवेयर साल्यूशन के पास पहुंचे। वहां हम लोगों को पता चला कि विश्वविद्यालय की यह वेबसाइट फर्जी है। उन्होंने होस्ट करने वालों का मोबाइल नंबर, ई मेल आईडी और नाम भी बताए।
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