सपा प्रत्याशी राजेंद्र एस बिंद
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लोकसभा चुनाव में भाजपा-अपना दल (एस) गठबंधन को टक्कर देने के लिए सपा ने जातीय समीकरण को फिर महत्व दिया है। भाजपा-अपना दल (एस) गठबंधन जहां सर्वाधिक पटेल मतदाताओं के मद्देनजर केंद्रीय मंत्री और मौजूदा सांसद अनुप्रिया पटेल को प्रत्याशी बनाने जा रही है।
बसपा से गठबंधन के बाद खाते में आई सीट से सपा ने बिंद बिरादरी के राजेंद्र एस बिंद पर दांव लगा दिया है। पिछले चुनाव में अपना दल की टिकट पर भाजपा के सहयोग से जीती अनुप्रिया के मुकाबले सपा द्वारा बिंद को टिकट देने का आधार जातीय है। संसदीय क्षेत्र में ढाई लाख से ऊपर पटेल बिरादरी के मतदाता हैं तो लगभग डेढ़ बिंद बिरादरी के लोग हैं।
इसके अलावा एक लाख से अधिक अनुसूचित जाति व लगभग 80 हजार यादव जाति के वोटर हैं। अन्य जाति भी दस हजार से लेकर डेढ़ लाख के बीच हैं। दोनों पार्टियों ने जातीय गुणा-गणित का आकलन कर प्रत्याशी बनाए हैं। हालांकि अनुप्रिया की उम्मीदवारी अभी घोषित नहीं है लेकिन उनका इसी सीट से लड़ना तय माना जा रहा है। अनुप्रिया भी मिर्जापुर की मूल निवासी नहीं हैं।
सपा ने 2014 के चुनाव में भी सुरेंद्र पटेल के रूप में बाहरी प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा था। वह वाराणसी के हैं। इस बार के चुनाव में पूर्व राज्यमंत्री कैलाश चौरसिया, पूर्व सांसद बाल कुमार पटेल, पूर्व जिलाध्यक्ष शिवशंकर यादव, जिलाध्यक्ष आशीष यादव, पूर्व विधायक जगतंबा पटेल समेत नेता टिकट के दावेदार थे।
भदोही के सुरियावां, जगतपुर निवासी राजेंद्र को प्रत्याशी बनाकर सपा ने जिले के करीब डेढ़ लाख बिंद वोटरों को साधने की कोशिश की है। माना जाता है कि बिंद बसपा को वोट देते हैं। ऐसे में बसपा का वोट बैंक लेकर सपा प्रत्याशी बढ़त बनाने की कोशिश करेंगे।
पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा की समुद्रा देवी बिंद को 217457 वोट मिले थे। वह दूसरे स्थान पर रही थीं। वहीं चौथे स्थान पर रहे सपा प्रत्याशी सुरेंद्र पटेल को 108859 वोट मिले थे। अपना दल एस की अनुप्रिया पटेल 436536 वोट पाकर जीती थीं।