वाराणसी में होने वाले निकाय चुनाव के सपा और कांग्रेस ने तैयारी शुरू कर दी है। निकाय चुनाव में सपा और कांग्रेस की राह अलग हो सकती है। सपा के आला नेताओं के निर्देश पर शहर और जिला इकाई पार्टी कार्यकर्ताओं से फीडबैक ले रही है।
वहीं, कांग्रेस के भी नेताओं का मानना है कि निकाय चुनाव कार्यकर्ताओं की इच्छा के अनुरूप ही लड़ा जाना चाहिए। हालांकि दोनों ही दलों में कई कार्यकर्ता ऐसे भी हैं, जिनका मानना है कि भाजपा को रोकने के लिए विपक्ष की एकजुटता निकाय चुनाव में भी बनी रहनी चाहिए।
दरअसल, निकाय चुनाव अपने दम पर लड़ने के हिमायती सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं का आकलन है कि विधानसभा चुनाव में पार्टी को कांग्रेस से गठजोड़ का नुकसान हुआ। सपा का वोट कांग्रेस को तो मिला लेकिन कांग्रेस का वोट सपा के बजाय भाजपा को चला गया।
निगम के 90 वार्डों में सपा का 37 सीटों पर कब्जा था, जबकि कांग्रेस के 19 और भाजपा के 33 पार्षद थे। महापौर की कुर्सी पर भाजपा का कब्जा रहा है।
उधर, निकाय चुनाव की तैयारियों के तहत ही सभी जिलों में सपा कार्यकर्ता सम्मेलन कराए जा रहे हैं।
वाराणसी महानगर के प्रभारी अवधेश यादव और जिले के प्रभारी जयशंकर पांडेय पांच दिन पूर्व वाराणसी आए थे और कार्यकर्ताओं का फीडबैक लिया। जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष को भी कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेने को कहा गया है। अब तक के फीडबैक में यही सामने आया है कि सपा अपने दम पर निकाय चुनाव में उतरे।
उधर, कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष सीताराम केशरी का कहना है कि पार्टी अपने दम पर निकाय चुनाव लड़ेगी। जहां तक गठबंधन की बात है तो अभी तक इस बारे में पार्टी हाईकमान से कोई दिशा निर्देश नहीं प्राप्त हुआ है। अभी तक पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।