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संस्कृत महाकाव्य के रचयिता महर्षि वाल्मीकि को किया नमन

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महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर शहर से लेकर गांव तक रामायण की चौपाईयां गूंजीं। मंदिरों में वाल्मीकि रामायण का पाठ के साथ ही भजन एवं दीपांजलि का आयोजन किया गया। शहर में विभिन्न संस्थाओं की ओर से चर्चा और गोष्ठी का भी आयोजन हुआ। आरएसएस की ओर से भी वाल्मीकि जयंती पर आयोजनों के तहत चर्चा व प्रसाद का वितरण हुआ।
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बुधवार को क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति विभाग की ओर से वाल्मीकि जयंती पर संकट मोचन हनुमान मंदिर, बिरदोपुर, महमूरगंज, राम मंदिर रामापुरा, हनुमान मंदिर मानसरोवर घाट, संकट हरण हनुमान मंदिर, बनारस स्टेशन, महर्षि वाल्मीकि शिव मंदिर, नरिया गेट, श्री राम मंदिर, गुरुधाम में वाल्मीकि रामायण का पाठ किया गया। भजन एवं दीपांजलि के जरिए श्रद्धासुमन अर्पित हुआ। स्थानीय कलाकारों द्वारा पाठ एवं गायन संपन्न हुआ। कार्यक्रम के अगले चरण में मंदिरों पर दीपांजलि का आयोजन किया गया।
महर्षि वाल्मीकि ने लिखा संस्कृत का पहला श्लोक
महर्षि वाल्मीकि जयंती पर राष्ट्रवादी चिंतक मंच की ओर से लहुराबीर स्थित कार्यालय पर गोष्ठी का आयोजन हुआ। वक्ताओं ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने विश्व में प्रथम संस्कृत के महाकाव्य की रचना की। वह विश्व के पहले खगोलशास्त्री थे। संस्कृत का पहला श्लोक महर्षि वाल्मीकि जी ने लिखा।
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महर्षि वाल्मीकि को किया नमन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से शरद पूर्णिमा एवं वाल्मीकि जयंती पर आयोजन हुए। काशी महानगर व काशी ग्रामीण में संघ की शाखा के कार्यकर्ताओं व बस्तियों के आम जनमानस द्वारा महर्षि वाल्मीकि जयंती एवं शरद पूर्णिमा का उत्सव मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से किया गया। इसके पश्चात रात्रि शाखा लगी। शाखा में एकल गीत, खेल, बौद्धिक एवं प्रार्थना के पश्चात सभी बंधुओं को शरद पूर्णिमा का प्रसाद (खीर) का वितरण किया गया।
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