अरबपति उद्योगपति सज्जन जिंदल ने प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के घाटों की सफाई और उसे सुंदर बनाने की जिम्मेदारी ली है। वह ऐसे पहले बिजनेस टायकून हैं जो घाटों के साफ करने के परियोजना के हिस्सा बने हैं।
केंद्र सरकार ने गंगा के तट पर हरिश्चंद्र घाट की मरम्मत और पुनर्स्थापना करने के लिए, मैग्नेट की फर्म जिंदल स्टील वर्क्स (जेएसडब्ल्यू) को करोड़ों के प्रोजक्ट की मंजूरी दे दी है। इस घाट पर ज्यादार लोग अंतिम संस्कार के लिए आते हैं।
परियोजना के डीपीआर के मुताबिक, अरबपति जिंदल की फर्म हरिश्चंद्र घाट में बलुआ पत्थर के साथ फर्श को भी बदल देगी और अंतिम संस्कार के लिए एक स्थान बनाया जाएगा। जो कि धुएं की जांच के लिए भी जिम्मेदार होगा।
जेएसडब्ल्यू नदी में प्रवाहित की जाने वाली पूजा सामग्री, गंदगी आदि को नियंत्रित करने का प्रयास करेगी, साथ ही दाह संस्कार के लिए कुंड आदि का निर्माण कराया जाएगा। साथ ही पथरीली दीवारों पर आई दरारों का भी पुनर्निर्माण कराएगी।
इस घाट में ज्यादातर बिजली के खंभे या तो खराब हो चुके हैं या तो काम नहीं कर रहे हैं। डीपीआर ने यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया।
जेएसडब्ल्यू द्वारा किए जाने वाले मरम्मत कार्यों की प्रारंभिक लागत वार्षिक रूप से 3.5 करोड़ रुपये होगी।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा बनाई गई और केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय, नदी विकास और गंगा कायाकल्प के द्वारा नियंत्रित की जा रही समिति को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की गई और फिर जेएसडब्ल्यू को मंजूरी दे दी। संस्था 3 अक्टूबर से अपना कार्य शुरू कर देगी।