गोदौलिया पर लाठीचार्ज में घायल स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गुरुवार की दोपहर शिव प्रसाद गुप्त अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद गंगा में गणेश प्रतिमा के विसर्जन का ऐलान कर दिया। सैकड़ों संतों-भक्तों का हुजूम नारेबाजी करते हुए उन्हें ह्वील चेयर पर लेकर केदार घाट पहुंचा, जहां मिट्टी की गणेश प्रतिमा बनाई और सविधि पूजा के बाद उसे गंगा में विसर्जित कर दिया गया।
पैर में गंभीर चोट आने की वजह से अविमुक्तेश्वरानंद अभी चल नहीं पा रहे हैं। विसर्जन का संकल्प पूरा होने के बाद उन्होंने अन्न ग्रहण किया। मठ पहुंचने पर उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए जब भी जरूरत पड़ेगी वह संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे।
द्वारका-शारदा, ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद दोपहर पौने तीन बजे एसएसपीजी अस्पताल से डिस्चार्ज हुए। इसके बाद उन्होंने गंगा में मूर्ति विसर्जन की घोषणा कर दी। उनका कहना था कि गंगा में गणेश प्रतिमा के विसर्जन का संकल्प लेकर वह गोदौलिया पहुंचे थे लेकिन वहां लाठीचार्ज कर उन्हें और विद्यामठ के बटुकों को जख्मी कर दिया गया।
जब तक मूर्ति विसर्जन का संकल्प पूरा नहीं होगा, तब तक वह अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे। सोनारपुरा चौराहे से ह्वील चेयर पर उनको लेकर नारेबाजी करते हुए संत-भक्त केदार घाट के लिए निकले। तब तक केदार घाट पर पीएसी लगा दी गई और मठ के आसपास पुलिस के जवान तैनात कर दिए गए।
घाट पहुंचने के बाद संतों ने मिट्टी की गणेश प्रतिमा बनाई। इसके बाद गंगा स्नान किया। फिर अनंत शास्त्री के आचार्यत्व में सविधि मंत्रोच्चार के साथ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रतिमा की आरती उतारी और फिर विसर्जन किया। इस दौरान धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो... जैसे नारे लगाए जा रहे थे।
गणेश प्रतिमा विसर्जन के समय केदार घाट पर दंडी संन्यासी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी बिमल देव आश्रम, प्रयाग से आए कुश्मानी जी, स्वामी विशुद्धानंद महाराज, श्री काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष श्रीप्रकाश मिश्र, अध्यापक परिषद के डॉ. रामकिशोर त्रिपाठी, रमेश चंद्र उपाध्याय, साध्वी पूर्णांबा, साध्वी शारदांबा समेत तमाम लोग उपस्थित थे।