देश के अलग-अलग राज्यों के पंडालों के रूप में संत के सपनों के इस बेगमपुरा मेें चहुंदिशि खुशियां छाने लगी हैं। जयंती के चार दिन पहले गुरुवार को ही यहां संत रविदास के अनुयायियों का रेला उमड़ पड़ा। इसी के साथ शिविरों में शुरू हो गया नाचने, गाने और खुशियां मनाने का दौर।
जयंती महोत्सव से चार दिन पहले गुरुवार को ही संत रविदास के जन्मस्थान सीर गोवर्धन की फिजा बदल गई। देर शाम तक हजारों की तादाद में अनुयायी उमड़ पड़े। पंडालों में रविदासियों के साजो-सामान के साथ उनका डेरा जम गया है। सड़कों पर रेला चलने लगा है। गुरु के जन्मस्थान तीर्थ पर देश के कोने-कोने से लाखों की तादाद में भक्त हाजिरी लगाएंगे। रविदास मंदिर में सत्संग के साथ ही गुरुवाणी का पाठ भी शुरू हो गया है। शिविर क्षेत्र में मिनी पंजाब की झलक मिलने लगी है।
संत रविदास की 639 वीं जयंती पर प्रधानमंत्री के सीर गोवर्धन आगमन को देखते हुए अनुयायियों में उत्साह नजर आ रहा है। रविदासियों की टोली देश के कोने -कोने से गुरु के जन्मस्थान तीर्थ पर हाजिरी लगाने के लिए निकल पड़ी है। पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश के शिविर गुरुवार को ही पैक हो गए। देर रात तक 30 हजार से अधिक भक्त सीरगोवर्धन पहुंच गए।
इसी के साथ शिविर क्षेत्र का माहौल बदल गया है। पंजाबी पगड़ी बांधे संत रविदास के अनुयायी जगह-जगह नजर आने लगे हैं। जिस रफ्तार से अनुयायियों के आने का सिलसिला शुरू हुआ है उससे दो दिन के भीतर मेला क्षेत्र में लगे करीब 60 से अधिक शिविरों के भर जाने का अनुमान है। अनुयायियों के उत्साह को देखते हुए संत रविदास जन्म स्थान पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट ने आसपास के खाली इलाकों में और टेंट लगवाने का फैसला किया है। कंट्रोल रूप प्रभारी और ट्रस्टी निरंजन दास चीमा ने बताया कि अतिरिक्त टेंट लगाने की व्यवस्था की जा रही है। मेला क्षेत्र में बिजली, पानी और प्रसाधन के इंतजामों को तेजी से अंतिम रूप दिया जा रहा है।