प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 फरवरी को सीर गोवर्धन स्थित रविदास मंदिर में सिर्फ 15 मिनट का ही समय दे पाएंगे। इसके पीछे बड़ी वजह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ता हैं।
खुफिया एजेंसियों का मानना है कि दिल्ली में जारी सियासी दंगल के मद्देनजर श्रद्धालु के तौर पर रविदास मंदिर आने वाले आप कार्यकर्ता पीएम को देखते ही नारेबाजी, हंगामा या फिर किसी अन्य तरीके से प्रतिरोध कर सकते हैं।
जिला प्रशासन ने इस असहज स्थिति से बचने का रास्ता निकाल लिया है। पीएम मोदी यहां सुबह आएंगे जबकि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल दोपहर बाद।
यानी, पीएम मोदी और दिल्ली के सीएम केजरीवाल दोनों आमने-सामने नहीं होंगे। भाजपा और आप के बीच जारी सियासी जंग को देखते हुए खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन और पुलिस ने कार्ययोजना तैयार की है।
उसके अनुसार पीएम के रविदास मंदिर कार्यक्रम के दौरान ही यदि अरविंद केजरीवाल शहर पहुंच जाते हैं तो उन्हें सीधे सीर गोवर्धन नहीं ले जाया जाएगा।
इस दौरान उन्हें बाबा विश्वनाथ, कालभैरव और संकटमोचन मंदिर का दर्शन-पूजन कराया जाएगा। पीएम जब बीएचयू के दीक्षांत समारोह में पहुंच जाएंगे तो केजरीवाल को रविदास मंदिर लाया जाएगा।
बुधवार को इसकी पुष्टि अनौपचारिक बातचीत में इंटेलीजेंस एजेंसी और पुलिस महकमे के शीर्ष अधिकारियों ने की। उनका कहना था कि मौजूदा सियासी गतिरोध को देखते हुए सभी एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
किसी भी तरह की कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न नहीं होने दी जाएगी। दोनों वीवीआईपी का दौरा सकुशल संपन्न कराने के लिए पुख्ता रणनीति बनाई गई है।
पीएम के रविदास मंदिर से बीएचयू पहुंचने के बाद ही वहां दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ले जाया जाएगा।