माघ पूर्णिमा पर संत रविदास की जयंती सीरगोवर्धन में धूमधाम से मनाई जाएगी। रैदासिया धर्म के प्रमुख संत निरंजन दास बेगमपुरा एक्सप्रेस से दो हजार संगत के साथ बृहस्पतिवार को बनारस पहुंचेंगे। इस बार जयंती समारोह में आने वाले रैदासियों की संख्या छह से सात लाख होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
सीरगोवर्धन में संत निरंजन दास के आने के साथ ही मेले की शुरुआत हो जाएगी। 22 फरवरी को संत निरंजन दास मेला क्षेत्र, लंगर हाॅल और पंडालों में तैयारियों का जायजा लेंगे। इस दौरान वह श्रद्धालुओं को दर्शन भी देंगे। उनके साथ दूसरी ट्रेनों से भी श्रद्धालु सुबह से ही आने शुरू हो जाएंगे। 23 फरवरी को नगवां स्थित संत रविदास पार्क में दीपोत्सव होगा। संत निरंजन दास की अगुवाई में रैदासी पूरे पार्क में दीप जलाकर संत रविदास के जन्मोत्सव का उल्लास मनाएंगे।
60 हजार से अधिक रैदासी मेला क्षेत्र के पंडालों में डेरा जमाए हुए हैं। बुधवार को भी 20 हजार से अधिक संगत देर रात तक सीर पहुंची। मेला क्षेत्र में देश के साथ ही विदेशों से भी रैदासी पहुंचने लगे हैं। शबद कीर्तन लंगर और रहने के लिए रविदासियों के लिए निशुल्क इंतजाम किए गए हैं। मेला क्षेत्र के आसपास के घरों के सभी कमरे भी फुल हो चुके हैं। वहीं मेला क्षेत्र में लगने वाली दुकानों की संख्या भी इस बार तीन से चार गुना बढ़ी है।
लंगर में बन रही हैं तीन लाख से अधिक रोटियां
संत रविदास के जयंती समारोह में हर साल से ज्यादा इस बार श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। इसको देखते हुए ही खाने-पीने और रहने का इंतजाम किया गया है। ट्रस्टी के एल सरोआ ने बताया कि इस बार छह से सात लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। लंगर में रोजाना ढाई लाख से अधिक रोटियां तैयार हो रही हैं। इसके अलाव डेढ़ क्विंटल चावल और सब्जी भी तैयार हो रही है। रोजाना खाने के मेन्यू में बदलाव किया जा रहा है। लंगर में सुबह चाय-नाश्ता, दोपहर का भोजन, शाम को चाय नाश्ता और रात में भोजन का इंतजाम है। खाने के साथ मीठा, नाश्ते में मठरी, पंजाबी नमकीन और सकरपाला होता है।
पंडालों में गूंज रहा है भजन कीर्तन और गुरुदेव का जयकारा
मेला क्षेत्र में बनाए गए पंडालों में भजन कीर्तन के साथ ही जो बोले सो निर्भय...जय गुरुदेव का जयकारा गूंज रहा है। पंडालों के अंदर और बाहर श्रद्धालुओं की टोलियां कीर्तन में व्यस्त हैं। सुबह और शाम का नजारा सीर में कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है। मंदिर से लेकर पूरे मेला क्षेत्र में नियमित रूप से अमृतवाणी का पाठ गूंज रहा है।