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ग्राउंड रिपोर्ट : एक सप्ताह से बाढ़ के पानी से घिरा है आजमगढ़ का सहसपुरा गांव, फैलने लगीं संक्रामक बीमारियां

Mon, 10 Aug 2020 01:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़

सार

  • गांव में बीमार लोगों को नहीं मिल पा रही दवा
  • एक वक्त के भोजन के सहारे कट रही जिंदगी
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बाढ़ में घिरा गांव... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सगड़ी तहसील के छोटी सरयू नदी पर बने जोकहरा बांध को कटे हुए रविवार को सात दिन पूरे हो गए। बांध के कटने के बाद से ही सहसपुरा गांव पूरी तरह से पानी में डूबा हुआ है। लगातार एक हफ्ते से पानी के बीच में रहने के कारण लोगों की हालत खराब होने लगी है। 

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बीमार लोगों को दवा नहीं मिल पा रही है। वहीं कोई एक वक्त भोजन कर दूसरे टाइम भूखे पेट काम चल रहा है। गांव में किरोसिन न मिलने के कारण लोग सरसो के तेल के दीये जला रहे हैं। कई लोगों के मिट्टी के घरों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि प्रशासन ने कड़ी मशक्कत के बाद शनिवार की शाम बंधे की मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया लेकिन गांवों में जमे पानी को निकलने में अभी कई दिन और लगेंगे।

संक्रामक बीमारियां फैलाने लगीं पांव
सहसपुरा गांव की प्रेमशीला पत्नी पंचदेव की तबियत खराब है। वह चारपाई पर लेटी हुई है। पूछने पर प्रेमशीला ने बताया कि बुखार है लेकिन गांव के पानी से घिरा होने के कारण दवा नहीं मिल पा रही है। घर पर कोई नहीं है। एक टाइम चारपाई पर रखकर किसी तरह से भोजन बनता है उसी से ही दोनों टाइम का काम चलाया जाता है। उषा, राजदेई और किसमती ने बताया कि एक हफ्ते से गांव पानी से घिरा हुआ है। इससे अब संक्रामक बिमारियां भी फैलने लगी हैं। गांव के पानी से घिरा होने के कारण गांव की बिजली भी गुल है। जिसके कारण अंधेरे में रहने को विवश हैं।
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किरोसिन के अभाव में जला रहे सरसों का दीपक
बद्री यादव ने बताया कि हमारे परिवार में कुल 25 सदस्य हैं। घर में पानी घुस गया है। जिससे खाने पीने का सारा सामान और पशुओं का चारा भी भीग गया है। पशुओं के चारे की भी समस्या खड़ी हो गई है। किरोसिन का तेल न मिलने के कारण रात के प्रकाश करने के लिए सरसो के तेल का दीपक जलाना पड़ रहा है। गांव में पानी जमा होने से चारो ओर से गंदगी फैल गई है। बीमारियों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। लेकिन अब तक न तो क्लोरीन की गोली मिली और ना ही गांव में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव ही किया गया।

कच्चा मकान गिरने से बेघर हुआ परिवार
बदामी पत्नी जगरूपन ने कहा कि हमारा मकान कच्चा था। चारों तरफ पानी लगने से गिर गया। हम खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। हमारे सामने जीवन यापन की समस्या खड़ी हो गई है। यहां तक कि भोजन का प्रबंध करना भी भारी हो गया है। हमारी समस्याएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। गांव को पानी से घिरे हुए एक सप्ताह हो गया लेकिन अभी तक दवा नहीं पहुंची। क्लोरीन की गोली न मिलने के कारण दूषित पानी पीने को लोग मजबूर हैं । ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव नहीं हुआ जबकि पानी के साथ गंदगी भी हमारे दरवाजे पर आकर जमी हुई है।

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