दोस्ती क्या होती है, यह कोई डारया यूरिएवा प्रोकीना से सीखे। एसिड अटैक की शिकार रूसी युवती नहीं चाहती कि उसकी जिंदगी को तबाह करने का प्रयास करने वाले सिद्धार्थ पर कोई कार्रवाई हो। हां, इतना जरूर जानना चाहती है कि उस पर तेजाब फेंकने के बाद कैसा महसूस कर रहा है उसका यह दोस्त।
आखिर क्या मिला इस दरिंदगी से उसे। एसिड से झुलसी प्रोकीना के जख्म गहरे हैं। शनिवार की शाम जब एयर एंबुलेंस से बेहतर उपचार के लिए उसे नई दिल्ली ले जाने की तैयारी हुई तो उसने पुलिस से कई बार मिन्नतें की कि सिद्धार्थ को माफ कर दिया जाए। वह कह रही थी, ‘आवेश में आकर इंसान गलती कर देता है। उसे एक मौका देकर भला आदमी बनने का अच्छा अवसर दिया जाए।’
करौंदी क्षेत्र की नंद नगर कॉलोनी में रूसी युवती डारया यूरिएवा प्रोकीना अपने दोस्त सिद्धार्थ श्रीवास्तव के घर ठहरी हुई थी। छह महीने पहले वाराणसी आगमन के दौरान प्रोकीना की सिद्धार्थ से दोस्ती हुई थी। फिर सिद्धार्थ के साथ उसके रिश्ते और प्रगाढ़ हो गए। शादी के लिए राजी न होने पर सिद्धार्थ ने उस पर एसिड उड़ेल कर दरिंदगी की हदें पार कर दी।
बीएचयू अस्पताल में इलाज के दौरान प्रोकीना ने पुलिस कर्मियों से कई बार सिद्धार्थ के बारे में पूछा। शनिवार की सुबह उसने लंका थानाध्यक्ष संजीव कुमार मिश्र से पूछा कि ‘मेरे साथ इस तरह की दरिंदगी के बाद आखिरकार कैसा महसूस कर रहा है मेरा दोस्त। उसे पछतावा हो रहा है या नहीं।’
शाम के समय नई दिल्ली रवाना होने से पहले उसने पुलिस से कई बार मिन्नतें की कि सिद्धार्थ को माफ कर दिया जाए। लंका एसओ द्वारा मुहैया कराए गए मोबाइल से प्रोकीना ने मास्को में रहने वाली अपनी मां से बात की। अपने साथ हुए हादसे की जानकारी बेहद संयमित होकर दी।
पुलिस को उसने बताया कि उसकी मां चाह रही हैं कि वह जैसे ही चलने-फिरने लायक हो, तत्काल वापस लौट आए। हालांकि उसका कहना कि उसे इंडिया अच्छा लगता है और वह यहां आती रहेगी। बातचीत के दौरान ही उसने पिता जूरी का हाल अपनी मां से पूछा।
डारया का पुलिस से कहना था कि सिद्धार्थ उसका एक अच्छा दोस्त है, जिसे वह एक हादसे के चलते खोना नहीं चाहती। सिद्धार्थ को माफ कर जीवन की मुख्य धारा में लौटने का मौका देने के लिए वह लगातार पुलिस से मिन्नत करती रही।